दिल्ली के शायर और अदीब
कुल: 118
इब्राहीम ज़ौक़
आख़िरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के उस्ताद और राजकवि , मिर्ज़ा ग़ालिब से उनकी प्रतिद्वंदिता प्रसिद्ध है।
मीर हसन देहलवी
प्रमुख मर्सिया-निगार। मसनवी ‘सहर-उल-बयान’ के लिए विख्यात
मोमिन ख़ाँ मोमिन
ग़ालिब और ज़ौक़ के समकालीन। वह हकीम, ज्योतिषी और शतरंज के खिलाड़ी भी थे। कहा जाता है मिर्ज़ा ग़ालीब ने उनके शेर ' तुम मेरे पास होते हो गोया/ जब कोई दूसरा नही होता ' पर अपना पूरा दीवान देने की बात कही थी।
मिर्ज़ा मज़हर जान-ए-जानाँ
मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता
बर्क़ देहलवी
दिल्ली की काव्य परम्परा के अंतिम दौर के शायरों में शामिल, अपने ड्रामे ‘कृष्ण अवतार’ के लिए प्रसिद्ध
फ़िराक़ देहलवी
आशुफ़्ता देहलवी
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
मुग़ल बादशाह शाह आ’लम सानी के उस्ताद
- जन्म : दिल्ली
अख़लाक़ अहमद आहन
शोधकर्ता और शायर, अपनी नज़्म "सोचने पे पहरा है" के लिए मशहूर/ प्रोफ़ेसर जेएनयू
अज़ीज़ मियाँ
बहादुर शाह ज़फ़र
बेदिल मुज़फ़्फ़रनगरी
- जन्म : दिल्ली
- निवास : मुज़फ़्फ़रनगर
- Shrine : मुज़फ़्फ़रनगर
चंद्रभान कैफ़ी देहलवी
क़ौमी, सामाजिक और देश की आज़ादी की भावना से समर्पित नज़्मों के लिए प्रसिद्ध. लम्बे अरसे तक उर्दू-फ़ारसी के उस्ताद रहे
दाग़ देहलवी
उर्दू के सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल। शायरी में चुस्ती , शोख़ी और मुहावरों के इस्तेमाल के लिए प्रसिद्ध
फ़िदा ख़ालिदी देहलवी
- जन्म : दिल्ली
ग़मगीन देहलवी
ग़नी देहलवी
गुलज़ार देहलवी
इक़बाल बानो
ख़ंदाँ देहलवी
ख़्वाजा बंदानवाज़ गेसूदराज़
ख़्वाजा हसन निज़ामी
ख़्वाजा हसन सानी
ख़्वाजा इलाही बख़्श मारूफ़
ख़्वाजा मीर असर
ख़्वाजा मीर दर्द
सूफ़ी शाइ’र, हिन्दुस्तानी मौसीक़ी के गहरे इ’ल्म के लिए मशहूर
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
अज़ीमाबाद के मुमताज़ सूफ़ी शाइ’र और बारगाह-ए-हज़रत-ए- इ’श्क़ के रूह-ए-रवाँ