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सलोक
फ़रीदा करंग ढंढोल्यां ऊडन नाही थाउं
फ़रीदा करंग ढंढोल्यां ऊडन नाही थाउंहक ना चूडीं मैंडी जीभड़ी जितु घिनां हरि नाउँ
बाबा फ़रीद
दोहा
समय पाय फल होत है समय पाय झरि जाय
समय पाय फल होत है समय पाय झरि जातसदा रहे नहिं एक सी का 'रहीम' पछितात
रहीम
शे'र
अहक़र बिहारी
सूफ़ी उद्धरण
पतझड़ के बग़ैर पेड़ों में फल नहीं लगते।
पतझड़ के बग़ैर पेड़ों में फल नहीं लगते।
श्री कृष्ण
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साखी
पतिब्रता का अंग - सब आये उस एक में डार पात फल फूल
सब आये उस एक में डार पात फल फूलअब कहो पाछे क्या रहा गहि पकड़ा जब मूल
कबीर
दोहा
होय न जाकी छाँह ढिग फल 'रहीम' अति दूर
होय न जाकी छाँह ढिग फल रहीम अति दूरबढ़िहू सो बिनु काजही जैसे तार खजूर
रहीम
चौपाई
उपदेश गुरू भक्ति का - रिध्दि सिध्दि फल कछू न चाहूँ
रिध्दि सिध्दि फल कछू न चाहूँ जगत कामना को नहिं लाऊँऔर कामना मैं नहिं राखूँ रसना नाम तुम्हारे भाखूँ
चरनदास जी
सूफ़ी उद्धरण
हिकमत एक दरख़्त है, जो दिल में उगता है, दिमाग़ में पलता है और ज़बान पर फल देता है।
हिकमत एक दरख़्त है, जो दिल में उगता है, दिमाग़ में पलता है और ज़बान पर फल देता है।
हज़रत अली
दोहा
वरु 'रहीम' कानन भलो बास करिय फल भोग
वरु 'रहीम' कानन भलो बास करिय फल भोगबंधु मध्य धनहीन ह्वै बसिबो उचित न योग
रहीम
दोहा
विनय मलिका - धूप हरै छाया करै भोजन को फल देत
धूप हरै छाया करै भोजन को फल देतसरनाये की करत है सब काहू पर हेत
दया बाई
शे'र
जल्वे से तिरे है कब ख़ाली फल फूल फली पत्ता डालीहै रंग तिरा गुलशन गुलशन सुब्हान-अल्लाह सुब्हान-अल्लाह
अकबर वारसी मेरठी
पद
तरवर एक मूल बिन ठाढ़ा बिन फूले फल लागे
तरवर एक मूल बिन ठाढ़ा बिन फूले फल लागेसाख-पत्र कछु नहि ताके सकल कमल-दल गाजै
कबीर
ग़ज़ल
बुत का पुजारी बन जा पगले मीठा फल तू पाएगादुनिया के सब छोड़ बखेरे पीछे तू पछताएगा
