Sufinama

बे-मिस्ल है तू हैं तिरे अंदाज़ निराले ऐ आगरे वाले

शाह अकबर दानापूरी

बे-मिस्ल है तू हैं तिरे अंदाज़ निराले ऐ आगरे वाले

शाह अकबर दानापूरी

MORE BYशाह अकबर दानापूरी

    बे-मिस्ल है तू हैं तिरे अंदाज़ निराले आगरे वाले

    रुख़ चाँद है ये गेसू हैं इस चाँद के हाले आगरे वाले

    तूफ़ान है दरिया में बपा रात है तारीक गन टूट गए हैं

    ये कश्ती-ए-दिल अब तो हुई तेरे हवाले आगरे वाले

    आवारा-ओ-सरगश्ता हूँ सहरा-ए-तलब में रस्ता मुझे बतला

    ताक़त रही पाँव में तलओं में हैं छाले आगरे वाले

    अफ़्सोस कि ग़फ़लत में कटी सारी जवानी अब मरने की ठानी

    लिल्लाह दम-ए-आख़िर मेरी बिगड़ी को बना ले आगरे वाले

    गिरने को है अब चाह-ए-बला में तिरा 'अकबर' है मुज़्तर-ओ-शश्दर

    तू ही सँभालेगा तो फिर कौन सँभाले आगरे वाले

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    छोटा हनीफ़ क़व्वाल

    छोटा हनीफ़ क़व्वाल

    स्रोत :
    • पुस्तक : तजल्लियात-ए-इ’श्क़ (पृष्ठ 291)
    • रचनाकार : शाह अकबर दानापुरी
    • प्रकाशन : शौकत शाहजहानी, आगरा (1896)
    • संस्करण : First

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