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ना'त-ओ-मनक़बत

ना’त हज़रत मुहम्मद (PBUH) की शान में लिखे गए कलाम को कहते हैं। ना’त को हम्द के बा’द पढ़ा जाता है। मनक़बत किसी सूफ़ी बुज़ुर्ग की शान में लिखी गयी शायरी को कहते हैं। हम्द और ना’त के बा’द अक्सर क़व्वाल जिस सूफ़ी बुज़ुर्ग के उर्स पर क़व्वाली पढ़ते हैं उनकी शान में मनक़बत पढ़ी जाती है।

1080 -1131/41

मशहूर ग़ज़ल-गो शाइ’र और फ़लसफ़ी

1946

मुसन्निफ़, अदीब, शाइ’र और मुदर्रिस

सिलसिला-ए-वारसिया से अ’क़ीदत रखने वाला शाइ'र

-1961

हाजी वारिस अ’ली शाह के मुरीद और अ’र्श गयावी के शागिर्द

बोलिए