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Sufinama

हर शब मनम फ़तादः ब-गिर्द-ए-सराए तू

अमीर ख़ुसरौ

हर शब मनम फ़तादः ब-गिर्द-ए-सराए तू

अमीर ख़ुसरौ

MORE BYअमीर ख़ुसरौ

    हर शब मनम फ़तादः ब-गिर्द-ए-सराए तू

    ता-रोज़ आह-ओ-नाला कनम अज़ बराए तू

    हर रात मैं तेरे आस्ताने के पास पड़ा रहता हूँ

    और सुब्ह तक तेरे ग़म में आह-ओ-ज़ारी रहता हूँ

    रोज़े कि ज़र्रा ज़र्रा शवद उस्तुख़्वान-ए-मन

    बाशद हनूज़ दर दिल-ए-तंगाम हवा-ए-तू

    जिस रोज़ कि मेरी हड्डियाँ ज़र्रा-ज़र्रा हो जाएँगी

    फिर भी मेरे छोटे से दिल में तेरी तमन्ना होगी

    हर-गिज़ शब-ए-विसाल-ए-तू रोज़े न-शुद मुरा

    वाए बर किसे कि बूवद मुब्तिला-ए-तू

    कोई भी दिन तेरे क़ुर्ब की रात लाया

    हाय अफ़्सोस उस पर जो तेरी मोहब्बत में मुब्तला होता है

    जान रा रवाँ बराए तो ख़्वाहम निसार कर्द

    दस्तम नमी-देहद कि निहम सर-ब-पा-ए-तू

    अपनी जान तेरे लिए क़ुर्बान कर दूँ

    बस नहीं चलता कि तेरे पाँव पर सर रख दूँ

    जाना बयाँ ब-बीन तू शिकस्ता दिली-ए-मन

    उम्रे गुज़श्तः अस्त मनम आश्ना-ए-तू

    महबूब और देख मेरी शिकस्ता दिली देख

    तेरी आश्नाई में मेरी इक उ’म्र बीत गई है

    बर हाल-ए-ज़ार-ए-मा नज़रे कुन ज़-रू-ए-लुत्फ़

    तू बादशाह-ए-हसनी 'ख़ुसरव' गदा-ऐ-तू

    मेहरबानी फ़रमा कर मेरी हालत-ए-ज़ार पर-लुत्फ़ की नज़र कर

    तू हुस्न का बादशाह है और खुसरौ तेरा गदा है

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    फरीद अयाज़

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    अ'ब्दुल हफ़ीज़ आरफ़ी

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