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रूबाईयात

रबाईआत रुबाई की जमा है, ये अरबी का लफ़्ज़ है जिसके मअनी चार के हैं। शायराना मज़मून में रुबाई इस सिन्फ़ का नाम है जिसमें चार मिसरों में एक मुकम्मल मज़मून अदा किया जाता है। रुबाई के 24 ओज़ान हैं, पहले दूसरे और चौथे मिसरे में क़ाफ़िया लाना ज़रूरी है।

1905 -1976

‘’आपको पाता नहीं जब आपको पाता हूँ मैं’’ लिखने वाले शाइ’र

1142 -1236

हिन्दुस्तान के मशहूर सूफ़ी जिन्हें ग़रीब-नवाज़ और सुलतानुल-हिंद भी कहा जाता है

1721 -1785

सूफ़ी शाइ’र, हिन्दुस्तानी मौसीक़ी के गहरे इ’ल्म के लिए मशहूर

1721 -1785

सूफ़ी शायर, मीर तक़ी मीर के समकालीन। भारतीय संगीत के गहरे ज्ञान के लिए प्रसिध्द

1715 -1788

अज़ीमाबाद के मुमताज़ सूफ़ी शाइ’र और बारगाह-ए-हज़रत-ए- इ’श्क़ के रूह-ए-रवाँ

1996

ख़ानक़ाह नासरिया, सहारनपुर के चश्म-ओ-चराग़

1126 -1198

ईरान का मशहूर फ़ारसी शाइ’र

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