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सलाम

यह एक विधा है जिसमे पीर,पैग़म्बर और बुजुर्गों पर सलाम भेजा जाता है। यह एक दुआ होती है। सलाम का अर्थ सलामती है।सलाम एक दुआ है कि सब सूफ़ी सुख और अमन बाटें।

1843 -1909

बिहार के महान सूफ़ी कवि

1928 -1985

हाजी वारिस अ’ली शाह के दीवाने और ना’तिया कलाम का मजमूआ’ “मुअ’त्तर मुअ’त्तर के शाइ’र

1899 -1978

उर्दू, फ़ारसी और पंजाबी ज़बान के शाइ’र

1972

आ’दिल शाह वारसी के मुरीद

1988

इलाहाबाद से तअ’ल्लुक़ रखने वाले नौजवान विद्वान

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