आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "जबीन-ए-बंदगी"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "जबीन-ए-बंदगी"
शे'र
निकल कर ज़ुल्फ़ से पहुँचूँगा क्यूँकर मुसहफ़-ए-रुख़ परअकेला हूँ अँधेरी रात है और दूर मंज़िल है
अकबर वारसी मेरठी
ग़ज़ल
जबीन-ए-बंदगी आज़ाद हो क़ैद त'अय्युन सेकि फ़र्क़-ए-दैर-ओ-काबा ही हरीफ़-ए-ज़ौक़-ए-सज्दा है
नियाज़ मकनपुरी
बैत
जबीन-ए-शौक़ उसी को तलाश करती है
जबीन-ए-शौक़ उसी को तलाश करती है'क़मर' दयार है जो हर दयार से बाला
क़मर वारसी
ना'त-ओ-मनक़बत
पूछा मैं ने जब कि तू ने देखा ऐ जबीं ऐसा आस्ताँ कहींबोली यूँ जबीन-ए-बंदगी की क़सम नहीं नहीं नहीं
शब्बीर साजिद मेहरवी
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "जबीन-ए-बंदगी"
ना'त-ओ-मनक़बत
कोई सलीक़ा है आरज़ू का न बंदगी मेरी बंदगी हैये सब तुम्हारा करम है आक़ा कि बात अब तक बनी हुई है
ख़ालिद महमूद नक़्शबंदी
ना'त-ओ-मनक़बत
जब लुत्फ़-ए-बंदगी है अदा यूँ नवाज़ होख़्वाजा के दर पे भेजी जबीन-ए-नियाज़ हो
बाक़िर शाहजहांपुरी
कलाम
काश मिरी जबीन-ए-शौक़ सज्दों से सरफ़राज़ होयार की ख़ाक-ए-आस्ताँ ताज-ए-सर-ए-नियाज़ हो
बेदम शाह वारसी
सूफ़ी उद्धरण
जिस तरह रोज़ी पहुँचाना ख़ुदा की रब्बानी सिफ़त है, उसी तरह उसका ज़िक्र करना बंदे की बंदगी है।
जिस तरह रोज़ी पहुँचाना ख़ुदा की रब्बानी सिफ़त है, उसी तरह उसका ज़िक्र करना बंदे की बंदगी है।
हाजी वारिस अली शाह
फ़ारसी कलाम
ऐ ख़ाक-ए-दर गह-ए-तु जबीन-ए-नियाज़-ए-माक़ुर्बान-ए-यक-निगाह तु 'उम्र-ए-दराज़-ए-मा
फ़र्द फुलवारवी
कलाम
तेरा आस्ताना-ए-नाज़ हो ये मेरी जबीन-ए-नियाज़ होमज़ा जब है पेश-ए-नज़र हो तू मेरी हस्ती महव-ए-नमाज़ हो


