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चौपाई
अब की काल द्रष्टि कैरीक, पहुँच्यो आयकै बैरीक।।
कहूं ही निकट ही डोल्योक, न भावै निकट की बाल्योक।।पासी घात करि सटक्योक, मांजी खाट में पटक्योक।।
महात्मा षेमदास जी
राग आधारित पद
साधु आया मेरे द्वार, में तन मन वारि करो मनवारि - राग गौड
वे साध सुखां की रासी रे, काटै जन्म जन्म की पासी रे।।जन सेवादास सुख पायारे, जब साधां दरस दिखायारे।।
महाराज अमरपुरुष जी
पद
हरि हरि भज मन त्यज कुमत को सूमत यो है निजनिरवानी
हरि हरि भज मन त्यज कुमत को सूमत यो है निजनिरवानीदो दिन खातर भव के पासी जग भ्रमनामो है हयरानी
अनंत महाराज
समस्त