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क़िस्मत ने आह हम को ये दिन भी दिखा दिएक़िस्मत पे ए'तिबार किया हाए क्या किया
ग़म ब-ज़ाहिर तो बहुत तल्ख़ है लेकिन ऐ 'आह'यही इंसान को इंसान बना देता है
हर-दम आती है गरचे आह पर आहपर कोई कारगर नहीं आती
मैं अपनी आह के सदक़े कि मेरी आह में भीतिरी निगाह के अंदाज़ पाए जाते हैं
आह दुनिया सरा-ए-फ़ानी हैकिस क़दर मुख़्तसर कहानी है
Kulliyat-e-Azeez
मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
1931शाइरी
Roohani Mukalma
मुनव्वर लखनवी
1960सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
Hayat-e-Moazzam
मुनीर लखनवी
1949जीवनी
Masnavi Riyaz-e-Ishq
महशर काज़िम हुसैन लखनवी
1889शाइरी
Risala-e-Aah-e-Sard
अननोन ऑथर
1893
Fazal Lucknovi
सय्यद हुसैन आरिफ नकवी
2004
Wahda-tul-Wajood
अब्दुल अली अंसारी लखनवी
1971
कोशिश-ए-नातमाम
शाइसता अख़तर सहरावर्दी
1950कि़स्सा / दास्तान
Aah-e-Wahshi
1897मुंशी नवल किशोर के प्रकाशन
Rasail-e-Shah Waliullah R. A.
Maqaam-e-Mulla Faqeer R. A.
शब्बीर हसन ख़ाँ
1991सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
तारीख़-ए-रसूल
ख़्वाजा हसन निज़ामी
1948
Majmua-e-Rasail-e-Arba Dard
ख़्वाजा मीर दर्द
1892सूफ़ीवाद / रहस्यवाद
Hubb-e-Rasool S. A. W.
रफीक़ अहमद
2003
Sufism Omar Khayyam and E. Fitzgerald
सा. एच. ए. बजरडेगार्ड
1915
पैहम जो आह आह किए जा रहा हूँ मैंदौलत है ग़म ज़कात दिए जा रहा हूँ मैं
ज़ीं तूल-ए-अमल आह चे ख़्वाही कर्दनज़ीं ख़्वाहिश-ए-जाँ-काह चे ख़्वाही कर्दन
न पूछो बे-नियाज़ी आह तर्ज़-ए-इम्तिहाँ देखोमिलाई ख़ाक में हँस हँस के मेरी आबरू बरसों
दो क़दम पर रह गई है मंज़िल-ए-मक़्सूद आहछोड़ कर तन्हा न जाओ हमरहाँ बहर-ए-ख़ुदा
क्यूँ मैं फ़िराक़-ए-यार में आह-ओ-फ़ुग़ाँ करूँ'कौसर' दिल-ए-हज़ीं जरस-ए-कारवाँ नहीं
अस्सलाम ऐ मालिक-ए-ख़ुल्द-ए-बरींअस्सलाम ऐ जान-ए-जान-ए-’आरिफ़ीं
किसी को ख़बर है आह मिरे दाग़-ए-इ’श्क़ कीख़ामोश हो के जलता है कबाब-ए-दिल
अस्सलाम ऐ वाक़िफ़-ए-राज़-ए-निहानी अस्सलामआप बन-कर साहिब-ए-राज़-ए-निहाँ पैदा हुए
किस तरह दिखाऊँ आह तुझ कोमैं अपनी ये ख़राब-हाली
मुझे मक़्सद-ए-ज़िंदगी दीजिएबुला लीजिए पेश-ए-बाबुस्सलाम
सैलाब चश्म-ए-अश्क में होंटों पे आह हैऐ दर्द-ए-दिल बहुत मिरी हालत तबाह है
इक आह करे जो दिल-ए-दीवाना हमारादो हर्फ़ों में बस ख़त्म हो अफ़्साना हमारा
ऐ दीदा-ए-दिल जल्वा-ए-जानाना कहाँ हैअपने तो सभी बैठे हैं बेगाना कहाँ है
अब क्यूँ ढूँडूँ वो चश्म-ए-करम होने दे सितम बाला-ए-सितममैं चाहता हूँ ऐ जज़्बा-ए-ग़म मुश्किल पस-ए-मुश्किल आ जाए
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