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कलाम
क्या कहें मिल्लत-ओ-दीं कुफ़्र है ईमाँ अपनापेश-ए-बुत-ए-सज्दा है और दैर है ऐवाँ अपना
तसद्दुक़ अ’ली असद
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अदा
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कुंडलिया
बंदा बाजी झूठ है, मत सांची करमान।
बंदा बाजी झूठ है, मत सांची करमान।कहां बीरबल गंग है, कहां अकब्बर खान।।
दीन दरवेश
कुंडलिया
माया-माया करत है, खरच्या खाया नाहिं।
माया-माया करत है, खरच्या खाया नाहिं।सो नर ऐसे जाहिंगे, ज्यों बादर की छाहिं।।
दीन दरवेश
कुंडलिया
बंदा बहुत न फूलिए, खुदा खियेगा नहिं।
बंदा बहुत न फूलिए, खुदा खियेगा नहिं।जोर जुलम कीजै नहीं, मिरतलोक के माहिं।।
दीन दरवेश
कुंडलिया
गड़े नगारे कूचकै, छिनभर छाना नाहिं।
गड़े नगारे कूचकै, छिनभर छाना नाहिं।कौन आज को काल को, पाव पलक के मांहि।।
दीन दरवेश
कविता
पिय के संग एरी नार चौसर क्यों नहि खेले
पिय के संग एरी नार चौसर क्यों नहि खेलेइश चौसर का निपट सार जोबना यह दिन है तिन चार
अज़ीज़ दीन
कुंडलिया
हिंदू कहें सो हम बड़े, मुसलमान कहें हम्म ।
हिंदू कहें सो हम बड़े, मुसलमान कहें हम्म ।एक मूंग दो झाड़ हैं, कुण ज्यादा कुण कम्म।।
दीन दरवेश
सूफ़ी कहावत
हमनशीन-ए- तू अज़ तू बा बायद। ता तोरा अक़्ल ओ दीन बे अफ़ज़ायद
आपका साथी आपसे बढ़कर होना चाहिए, ताकि आपकी बुद्धि और धर्म में वृद्धि हो
वाचिक परंपरा
ना'त-ओ-मनक़बत
मुस्तफ़ा के दीन की बक़ा मिरे हुसैन हैंया'नी राज़-ए-वहदत-ए-ख़ुदा मिरे हुसैन हैं
आमिर रहमती
शे'र
उमर वारसी
ना'त-ओ-मनक़बत
अहल-ए-सफ़ा के दीन का क़िब्ला हुसैन हैंअहल-ए-नज़र के वास्ते का'बा हुसैन हैं


