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बसंत
ख़्वाजा मोइनुद्दीन के घर आज धाती है बसंतक्या बन बना और सज सजा मुजरे को आती है बसंत
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कवित्त
कालिय दमन - आपनो सो ढोटा हम सब ही को जानत है
आपनो सो ढोटा हम सब ही को जानत हैदोऊ प्रानी सब ही के काज नित धावही
रसखान
समस्त