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ना'त-ओ-मनक़बत
आँगन मेरे आया दिलदार बिस्मिल्लाह बिस्मिल्लाहकीता मैं सिर्र-ए-सिदक़ यक-बार नज़रुल्लाह नज़रुल्लाह
क़ादिर बख़्श बेदिल
ना'त-ओ-मनक़बत
नूर-ए-ख़ुदा हैं पाक-ए-मोहम्मद ख़ालिक़ के दिलदारसल्ले-'अला हैं हर दो जग में नबियों के सरदार
इलाह बख़्श ख़ाँ
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पद
जिस में होए सुखी भला सो कर ले ऐ मधमाता
वक़्त पड़े पर भाई बेटा काम कुई नहीं आताहैगा ऐ 'दिलदार' उन्हों से जीते जी का नाता
कवि दिलदार
पद
अब अहवाल जहाँ का ऐ 'दिलदार' अजब देखे हैं हम
अब अहवाल जहाँ का ऐ दिलदार अजब देखे हैं हमसौम सलात से नफ़रत है और अमल-ए-बदी पर हैं मोहकम
कवि दिलदार
पद
वो मेरा महबूब पियारा किस किस रंग में आया
मूसा हो फ़िरऔन डुबाया ईसा आप कहायाहम ने ऐ 'दिलदार' प्यारे हर में हर को पाया
कवि दिलदार
पद
काम जहाँ का ऐ 'दिलदार' ये जानो सारा फक्कड़ है
काम जहाँ का ऐ दिलदार ये जानो सारा फक्कड़ हैआसमान जो खड़ा है सर पर बहुत पुराना मक्कड़ है
कवि दिलदार
पद
आज बहार चमन में माखन तेरी हैगी जैसी
कहना तुम 'दिलदार' का मानो नहीं ख़िजा जो वैसीफिर न मिलेंगी फ़ुर्सेत दम की रहोगी रोती वैसी
कवि दिलदार
पद
प्यू मिलने के खोज में हम ने सारी उम्र गंवाया
गह पकड़ा जब गुरु का दामन तब उन भेद बतायाघर बैठे 'दिलदार' हम अपने पीयु प्यारा पाया
कवि दिलदार
पद
किस की है उम्मीद तुम्हें याँ कौन तुम्हारा अपना है
बेहतर तेरी ख़ातिर ऐ 'दिलदार' ख़ुदा का जपना हैबाक़ी जो आगे है उस को रोना है कल्पना है
कवि दिलदार
पद
जो आये सो गये यहाँ से फिर फिर देखा सारा
रहा नहीं ज़ह्हाक फ़रीदूं नहीं सिकंदर दारारहेगा वो 'दिलदार' बनाया जिसने सब संसारा
कवि दिलदार
पद
ये जो सूरत जुदी जुदी है इक माई के जाये हैं
कोई मुसलमाँ कुई युहुदी कोई हुनूद कहाये हैवहदत से कसरत में आ 'दिलदार' ये सब भरमाये हैं
कवि दिलदार
पद
सौम सलात रिया से कर कर आप को आ'ला किया
शैख़ बना कर ले ले सब से तन को पाला कियाज़र ख़ातिर 'दिलदार' उन्हीं ने मुँह को काला किया
कवि दिलदार
पद
जिस को जो कुछ चाहा करने उसका वो सामान किया
मूसा को पैग़म्बर कर फ़िरऔन को बे-ईमान किया'दिलदार' किसी को क़हर से मारा किस ही पर एहसान किया
कवि दिलदार
पद
कोई आया कोई गया किसी के अब जाने की बारी है
तूल अमल का फिर क्या फिर क्या महल की ये तय्यारी हैहवस तुम्हें 'दिलदार' अबस ये शाही और सरदारी है
कवि दिलदार
पद
इस दुनिया पर दिल मत बाँधो इस का काम न्यारा है
जो आए सो गुज़र गये सब ये नद्दी का धारा हैऐ 'दिलदार' वही है ज्ञानी जिस ने किया किनारा है
