आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "funoon shumara number 003 004 ahmad nadeem qasmi magazines"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "funoon shumara number 003 004 ahmad nadeem qasmi magazines"
ना'त-ओ-मनक़बत
कुछ नहीं माँगता शाहों से ये शैदा तेराइस की दौलत है फ़क़त नक़्श-ए-कफ़-ए-पा तेरा
अहमद नदीम क़ासमी
अन्य परिणाम "funoon shumara number 003 004 ahmad nadeem qasmi magazines"
कलाम
घनी शाख़ों में छुप कर जब कोई चिड़िया चहकती हैतो मेरे दिल में क्यूँ हसरत की चिंगारी भड़कती है
अहमद नदीम क़ासमी
ना'त-ओ-मनक़बत
क़तरा माँगे जो कोई तो उसे दरिया दे देमुझ को कुछ और न दे अपनी तमन्ना दे दे
अहमद नदीम क़ासमी
ना'त-ओ-मनक़बत
रूह-ओ-बदन में क़ौल-ओ-'अमल में कितने जमील हैं आपइंसाँ है मस्जूद-ए-मलाइक इस की दलील हैं आप
अहमद नदीम क़ासमी
कलाम
शान-ए-ख़ुदा भी आप महबूब-ए-ख़ुदा भी आप हैंतज्सीम-ए-हक़ भी आप हैं और हक़-नुमा भी आप हैं
अहमद नदीम क़ासमी
ग़ज़ल
दिल में उतरते हर्फ़ से मुझ का मिला पता तिरामो’जज़ा-ए-हुस्न-ए-सौत का ज़म्ज़मा-ए-सदा तिरा
अहमद नदीम क़ासमी
ना'त-ओ-मनक़बत
मुझ को तो अपनी जाँ से भी प्यारा है उन का नामशब है अगर हयात सितारा है उन का नाम