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ग़ज़ल
तस्वीर-ए-तसव्वुर में उन की जिस वक़्त जमाई जाती हैउस पर्दा-नशीं को देखने की फिर ताब न लाई जाती है
अमीर बख़्श साबरी
ग़ज़ल
कामिल शत्तारी
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कलाम
हू दा जामा पहन कराहाँ इस्म कमावण ज़ाती हूकुफ़र इस्लाम मक़ाम न मंज़ल न उत्थ मौत हयाती हू
सुल्तान बाहू
सूफ़ी उद्धरण
"जिस व्यक्ति में ये 3 आदतें जमा हो जाएंगी तो यूं समझना चाहिए कि हक़ीक़त में ईश्वर उसे दोस्त रखता है"।
ख़्वाजा ग़रीब नवाज़
शे'र
फूले नहीं समाते हो जामा में मिस्ल-ए-गुलपहुँचा है तुम को आज कसो का पयाम-ए-ख़ास
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
दोहा
'रहमन' गली है सॉकरी दूजो ना ठहराहिं
'रहमन' गली है सॉकरी दूजो ना ठहराहिंआपु अहै तो हरि नहीं हरि तो आपुन नाहिं