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ना'त-ओ-मनक़बत
जन्नत-उल-फ़िरदौस से बेहतर है जा-ए-ग़ौस-ए-पाकख़ुल्द में रिज़वाँ भी करता है सना-ए-ग़ौस-ए-पाक
अज्ञात
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ तालिब-ए-फ़िरदौस ब-रौ सू-ए-मोहम्मदचूँ ख़ुल्द-ए-बरीं आमदः दर कू-ए-मोहम्मद
अमीर हसन अला सिज्ज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
शैदा वारसी
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शे'र
हम ऐसे ग़र्क़ दरिया-ए-गुनह जन्नत में जा निकलेतवान-ए-लत्मा-ए-मौज-ए-शफ़ा’अत हो तो ऐसी हो
आसी गाज़ीपुरी
शे'र
राह में जन्नत 'हफ़ीज़' आवाज़ देती ही रहीहम ने मुड़ कर भी न देखा कर्बला जाते हुए
हफ़ीज़ फ़र्रूख़ाबादी
सूफ़ी लेख
हज़रत ग़ौस ग्वालियरी और योग पर उनकी किताब "बह्र-उल-हयात"
हज़रत ग़ौस ग्वालियरी शत्तारिया सिलसिले के महान सूफ़ी संत थे. शत्तारी सिलसिला आप के समय बड़ा
सुमन मिश्र
ना'त-ओ-मनक़बत
दर जन्नत है दरवाज़ा मु'ईनुद्दीन चिश्ती काजहाँ फिर क्यूँ न हो शैदा मु'ईनुद्दीन चिश्ती का
अज्ञात
शे'र
तलाश-ए-बुत में मुझ को देख कर जन्नत में सब बोलेये काफ़िर क्यूँ चला आया मुसलमानों की बस्ती में
मुज़तर ख़ैराबादी
ना'त-ओ-मनक़बत
क्या करे लेके जो हो 'आशिक़-ए-हज़रत जन्नतवा'इज़ा तेरे लिए है ये ग़नीमत जन्नत
महाराजा किशन प्रसाद
शे'र
'नसीर'-ए-खस्तः-जाँ जन्नत से इस कूचे को कब बदलेब अज़ ज़िल्ल-ए-हुमा है यार की दीवार का साया
शाह नसीर
शे'र
क्यूँ न दोज़ख़ भी हो जन्नत मुझे जब ख़ुद वो कहेइस गुनहगार को ले जाओ ये मग़्फ़ूर नहीं
इरफ़ान इस्लामपुरी
शे'र
मिला क्या हज़रत-ए-आदम को फल जन्नत से आने कान क्यूँ उस ग़म से सीन: चाक हो गंदुम के दाने का
शाह नसीर
बैत
याद दिलाओ न मुझ को जन्नत की
याद दिलाओ न मुझ को जन्नत कीइक जहाँ है जहाँ मैं रहता था
