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ना'त-ओ-मनक़बत
महफ़ूज़ूल्लाह महफ़ूज़
ना'त-ओ-मनक़बत
महफ़ूज़ूल्लाह महफ़ूज़
कलाम
अज़्म-ए-फ़रियाद! उन्हें ऐ दिल-ए-नाशाद नहींमस्लक-ए-अहल-ए-वफ़ा ज़ब्त है फ़रियाद नहीं
सीमाब अकबराबादी
ना'त-ओ-मनक़बत
तिरे अल्ताफ़ से शाहा उसे ख़ौफ़-ए-क़यामत क्याजो ख़ादिम हो तिरे दर का मु'ईनुद्दीन अजमेरी
महफ़ूज़ूल्लाह महफ़ूज़
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ना'त-ओ-मनक़बत
महताब-ए-सतह-ए-बे-खु़दी नाहिद-ए-कैफ़-ए-मा’नवीख़ुर्शीद-ए-चर्ख़-ए-सरवरी पीरान-ए-साबिर कलियरी
सीमाब अकबराबादी
ना'त-ओ-मनक़बत
पैग़ंबर-ए-तौहीद-ए-सरा पर्दा-ए-रहमतख़ुद क़िब्ला-ओ-ख़ुद क़िबला-नुमा अहमद-ए-मुख़्तार
सीमाब अकबराबादी
ग़ज़ल
रह-ए-उल्फ़त में मिट-मिट कर ग़म-ए-फ़ुर्क़त में मर-मर करकिसी दिन होही जाएगी फ़ना मेरी बक़ा मेरी
महफ़ूज़ सम्भली
शे'र
वो ऐ 'सीमाब' क्यूँ सर-ग़श्तः-ए-तसनीम-ओ-जन्नत होमयस्सर जिस को सैर-ए-ताज और जमुना का साहिल है
सीमाब अकबराबादी
ग़ज़ल
ख़ुदा रखे सलामत जज़्बा-ए-शौक़-ए-जुनूँ तुझ कोकि तेरे फ़ैज़ से कोह-ओ-बयाबाँ देख लेता हूँ