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दोहा
विनय मलिका - ठग पापी कपटी कुटिल ये लच्छन मोहिं माहिं
ठग पापी कपटी कुटिल ये लच्छन मोहिं माहिंजैसो तैसो तेर ही अरु काहू को नाहिं
दया बाई
दोहा
सतगुरू - शब्द बान मोहिं मारिया लगी कलेजे माहिं
शब्द बान मोहिं मारिया लगी कलेजे माहिंमारि हँसे सुकदेव जी बाक़ी छोड़ी नाहिं
चरनदास जी
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पद
ग्रंथ काया बेली - साचा सतगुर राम मिलावै सब कुछ काया माहिँ दिखावै
साचा सतगुर राम मिलावेसब कुछ काया माहिँ दिखावे टेक
दादू दयाल
पद
ककहरा - धध्धा ध्यान धरो घट माहिँ सुरति को काढ़ि निकारी
धध्धा ध्यान धरो घट माहिँ सुरति को काढ़ि निकारीउलटि चलो असमान हिये बिच होत उजारी
तुलसी साहिब हाथरस वाले
पद
ग्रंथ काया बेली - काया माहैँ बिषमी बाट
काया माहैँ करतार है सो निधि जाणै नाहिँ'दादू' गुरमुख पाइये सब कुछ काया माहिँ
दादू दयाल
पद
लावनी - ये नर तन दुरलभ माहिँ हाय नहिं पाई
ये नर तन दुरलभ माहिँ हाय नहिं पाईजाले अँखियों में पड़े करम दुखदाई
तुलसी साहिब हाथरस वाले
साखी
बिरह का अंग - जो जन बिरही नाम के सदा मगन मन माहिँ
जो जन बिरही नाम के सदा मगन मन माहिँज्यों दर्पन की सुंदरी किनहूँ पकड़ी नाहिं
कबीर
पद
सावन - ये सावन 'तुलसी' कहै खोजो सतसंग माहिँ
ये सावन 'तुलसी' कहै खोजो सतसंग माहिँगाइ गवन सज्जन करै बूझै सत मति पाइ
तुलसी साहिब हाथरस वाले
साखी
प्रेम का अंग - हम तुम्हरी सुमिरन करैं तुम मोहिं चितावौ नाहिं
हम तुम्हरी सुमिरन करैं तुम मोहिं चितावौ नाहिंसुमिरन मन की प्रीति है सो मन तुम्हीं माहिँ
कबीर
साखी
अली अकास सुरत चली गली गगन के माहिँ
अली अकास सुरत चली गली गगन के माहिँधाइ धमक ऊपर चढ़ी खड़ी महल मुस्काइ
तुलसी साहिब हाथरस वाले
साखी
बिरह का अंग - बासर सुख नहिं रैन सुख ना सुख सुपने माहिँ
बासर सुख नहिं रैन सुख ना सुख सुपने माहिँसत-गुरु से जो बीछुरे तिन को धूप न छाँहि
कबीर
पद
ककहरा - सस्सा सोच करी मन माहिँ पिंड कहो कौन सँवारा
सस्सा सोच करी मन माहिँ पिंड कहो कौन सँवाराआदि अन्त का खेल किया किन बिधि बिधि सारा
तुलसी साहिब हाथरस वाले
पद
ककहरा - पप्पा पड़े जगत के माहिँ भक्ति सुपने नहिं भावै
पप्पा पड़े जगत के माहिँ भक्ति सुपने नहिं भावैबाम्हन पंडित भेष सबै पुनि दान करावै
तुलसी साहिब हाथरस वाले
दोहा
विनय मलिका - मकसूदन मोहन मदन माधो मच्छ मुरार
मकसूदन मोहन मदन माधो मच्छ मुरारमदहारी श्रीमुकुटघर मधुपुर मल्ल-पछार
दया बाई
दोहा
विनय मलिका - कर्म रूप दरियाव से लीजै मोहिं बचाय
कर्म रूप दरियाव से लीजै मोहिं बचायचरन कमल तर राखिये मेहर जहाज चढ़ाय


