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मनहर
।। छंद मनहर ।।
जन हरिदास हरि सुमरिदास तुरसी तत पाया।श्याम लही सब स्यामता पद पूरण ध्याया।।
महात्मा हरिरामदास जी
छंद
।। छन्द मनहर ।।
सुनियो प्रवीण संत वीनती विनीत करूँगिनती न कोऊ मेरी क्षमा कीजियो।
महात्मा हरिरामदास जी
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राग आधारित पद
राग भैरव चौताल - शेख बहावदीन गोसल आलम सेदी ही सरमस्त
शेख बहावदीन गोसल आलम सेदी ही सरमस्तअष्टसिद्धि नवनिधि पाइयत मन बिच
तानसेन
चौपाई
माता कहे सुत मेरोक, राखूँ बीवतैं नेरौक।।
माता कहे सुत मेरोक, राखूँ बीवतैं नेरौक।।ना रहूँ नेकहूँ न्यारीक, पुत्र कै वदन पर वारीक।।
महात्मा षेमदास जी
दोहा
पंचकै तन काहू रच्यो, बच्यो अगन मंझार
पंचकै तन काहू रच्यो, बच्यो अगन मंझार।।जब इनमें कहू कौन था, जो अब कहै हमार।।
महात्मा षेमदास जी
दोहा
साध वेद सब टेरि हैं, सुनैन विषिया प्रांन।।
साध वेद सब टेरि हैं, सुनैन विषिया प्रांन।।पिंड पाप कै वस पडै, कहि कहि हारे ग्यांन।।
महात्मा षेमदास जी
दोहा
काहू पूरब पुन्य करि, तैं पाई नर देह।।
काहू पूरब पुन्य करि, तैं पाई नर देह।।कै महरवान हो मौजदी, जन्म सुफल कर लेह।।
महात्मा षेमदास जी
दोहा
साबधान होय चुप रहे, चितयौ है चहुँ और
साबधान होय चुप रहे, चितयौ है चहुँ और।।वाट वीचि ही ले गए, बसत साह की चोर।।
महात्मा षेमदास जी
दोहा
दस महीनां गर्भवास में, तहां रह्यौ मुख मूंदि।।
दस महीनां गर्भवास में, तहां रह्यौ मुख मूंदि।।जहां तात मात की गम नहीं, वहां राखनहारा कौन।।
महात्मा षेमदास जी
चौपाई
अब की काल द्रष्टि कैरीक, पहुँच्यो आयकै बैरीक।।
अब की काल द्रष्टि कैरीक, पहुँच्यो आयकै बैरीक।।मानूं गह्मो मृग ज्यूं चीतैक, नैडो चरत है नीकैक।।
महात्मा षेमदास जी
दोहा
अब कहूँ गोद कहूँ पालनै, कहूँ हासौ कहूँ रोज।।
अब कहूँ गोद कहूँ पालनै, कहूँ हासौ कहूँ रोज।।गिरयो पडयो घुटने चल्यो, नहीं ग्यांन को खोज।।
महात्मा षेमदास जी
दोहा
नख चख सौंज बनाय करि, प्रभु आन्यो मुक्ती ठौर।।
नख चख सौंज बनाय करि, प्रभु आन्यो मुक्ती ठौर।।निपजी में साझी घणा, धनी भए तब ओर।।
महात्मा षेमदास जी
चौपाई
अग्यांनी ग्यांन बिन खेल्योक, चल्यो पग हाथ तैं मेल्योक
अग्यांनी ग्यांन बिन खेल्योक, चल्यो पग हाथ तैं मेल्योक।।घुटणै चाल अति चालैक, माया फंद पग घालैक।।
महात्मा षेमदास जी
ना'त-ओ-मनक़बत
मुराद-ए-क़ल्ब हर मुरीद शैख़ सा'द शैख़ सा'दसुकून-ओ-राहत मज़ीद शैख़ सा'द शैख़ सा'द