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पद
दिल-जमई कर क्या बैठा है सुना नहीं तूने ये सौत
दिल-जमई कर क्या बैठा है सुना नहीं तूने ये सौतआया है क़ुरआन के अंदर सब दम को है ज़ायक़-ए-मौत
कवि दिलदार
कलाम
हू दा जामा पहन कराहाँ इस्म कमावण ज़ाती हूकुफ़र इस्लाम मक़ाम न मंज़ल न उत्थ मौत हयाती हू
सुल्तान बाहू
सूफ़ी उद्धरण
"जिस व्यक्ति में ये 3 आदतें जमा हो जाएंगी तो यूं समझना चाहिए कि हक़ीक़त में ईश्वर उसे दोस्त रखता है"।
ख़्वाजा ग़रीब नवाज़
शे'र
फूले नहीं समाते हो जामा में मिस्ल-ए-गुलपहुँचा है तुम को आज कसो का पयाम-ए-ख़ास