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कलाम
उन ने कहा ये मुझ से अब छोड़ दुख़्त-ए-रज़ कोपीरी में ऐ दिवाने ये कौन मस्तियाँ हैं
मोहम्मद रफ़ी सौदा
ग़ज़ल
अमीर मीनाई
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ग़ज़ल
काकुल-ए-मुश्कीं का अपने वो गिरह खोला है आजजम्अ'-ए-ख़ातिर काँ रहे जब है परेशाँ जाँ मिरा
तुराब अली दकनी
ना'त-ओ-मनक़बत
मिर्ज़ा रफ़ी बेग
सलोक
फ़रीदा जा जा रंग बाज़ार मैं सौदा ना कीतोम
फ़रीदा जा जा रंग बाज़ार मैं सौदा ना कीतोमहट वारिया वथ घडां याद पइओमु
बाबा फ़रीद
ग़ज़ल
इस तरह है हसरत-ए-दीदार-ए-जानाँ आज कलदीदा-ए-मुश्ताक़ ने गोया कभी देखा नहीं
मिर्ज़ा फ़िदा अली शाह मनन
दोहा
सौदा करो सो करि चलौ 'रहिमन' याही बाट
सौदा करो सो करि चलौ रहिमन याही बाटफिर सौदा पैहो नहीं दूरि जान है बाट
रहीम
ग़ज़ल
शहादत की घड़ी 'आशिक़ की चश्म-ए-शौक़ के आगेरुख़-ए-महबूब का जल्वा रुख़-ए-ख़ंजर से जाता है
डॉ. मंसूर फ़रीदी
ग़ज़ल
मोहब्बत दोनों जानिब हो तो लुत्फ़-ए-इश्क़ है वर्नाबिना-ए-इश्क़ का पानी पे रखना इस कि कहते हैं