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पद
नाम-माहात्म्य के पद - हरि नाम बिना नर ऐसा है ज्यों जग में खोटा पैसा है
हरि नाम बिना नर ऐसा है ज्यों जग में खोटा पैसा हैदीपक बिन मंदिर जैसा है
मीराबाई
सूफ़ी उद्धरण
पैसा न भी हो, तो भी तंदरुस्ती, इल्म और आज़ादी इन्सान की अज़ीम ख़ुशहाली है।
पैसा न भी हो, तो भी तंदरुस्ती, इल्म और आज़ादी इन्सान की अज़ीम ख़ुशहाली है।
अज्ञात
साखी
चितावनी का अंग - आसै पासै जो फिरै निपट पिसावै सोय
आसै पासै जो फिरै निपट पिसावै सोयकीला से लागा रहै ता को बिघन न होय
कबीर
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सूफ़ी उद्धरण
अगर तुम्हारे पास दो पैसे हों तो एक से रोटी ख़रीदो और दूसरे से फूल, रोटी तुम्हें ज़िंदगी देगी और फूल तुम्हें जीने का फ़न सिखाएगा।
अज्ञात
दोहा
मुनि नारी पाषाण ही कपि पसु गुह मातंग
मुनि नारी पाषाण ही कपि पसु गुह मातंगतीनों तारे राम जू तीनों मेरे अंग
रहीम
फ़ारसी कलाम
रुबूद जाँ पस-ए-दिल चश्म-ए-'उज़्र ख़्वाह-ए-कसेशिकायतेस्त ब-सद 'अफ़्व अज़ निगाह-ए-कसे
मयकश अकबराबादी
ग़ज़ल
पस-ए-पर्दा तुझे हर बज़्म में शामिल समझते हैंकोई महफ़िल हो हम उस को तिरी महफ़िल समझते हैं
ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
शे'र
पस-ए-मुर्दन तो मुझ को क़ब्र में राहत से रहने दोतुम्हारी ठोकरों से उड़ता है ख़ाका क़यामत का
अकबर वारसी मेरठी
शे'र
पस-ए-मुर्दन इरादा दिल में था जो कू-ए-क़ातिल कालहद में ख़ुश हुआ मैं नाम सुनकर पहली मंज़िल का
ग़ाफ़िल लखनवी
ग़ज़ल
पस-ए-मुर्दन इरादा दिल में था जो कू-ए-क़ातिल कालहद में ख़ुश हुआ मैं नाम सुन कर पहली मंज़िल का