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दोहा
रूप कथा पद चारु पट कंचन दोहा लाल
रूप कथा पद चारु पट कंचन दोहा लालज्यों ज्यों निरखत सूक्ष्म गति मोल 'रहीम' बिसाल
रहीम
दोहा
पीतम पत तुम हाथ है दुखियन के राज
पीतम पत तुम हाथ है दुखियन के राज'अमीनुद्दीन' पे कृपा करो लाज रक्खो महाराज
अमीनुद्दीन वारसी
दोहा
मैं निर्गुणी प्रतिपाल पत सदा आस तुम पास
मैं निर्गुणी प्रतिपाल पत सदअन आस तुम पासनियरे रहो दयाल सत जस फूलन मा बास
अमीनुद्दीन वारसी
साखी
पतिब्रता का अंग - सब आये उस एक में डार पात फल फूल
सब आये उस एक में डार पात फल फूलअब कहो पाछे क्या रहा गहि पकड़ा जब मूल
कबीर
दोहा
'औघट' पूजा-पाट तजो लगा प्रेम का रोग
'औघट' पूजा-पाट तजो लगा प्रेम का रोगसत्त-गुरु का ध्यान रहे यही है अपना जोग
औघट शाह वारसी
दोहा
'रहिमन' अपने पेट सो बहुत कह्यो समुझाय
'रहिमन' अपने पेट सो बहुत कह्यो समुझायजो तू अनखाए रहे तोसों को अनखाय
रहीम
सूफ़ी उद्धरण
जब पेट ख़ाली होता है, तो पूरा जिस्म रूह बन जाता है और जब पेट भरा होता है, तो पूरी रूह जिस्म बन जाती है।
सादी शीराज़ी
सूफ़ी उद्धरण
ऐ हक़ीर पेट! एक ही रोटी से मुत्मईन हो जा, ताकि गु़लामी से तुझे कमर न झुकानी पड़े।
ऐ हक़ीर पेट! एक ही रोटी से मुत्मईन हो जा, ताकि गु़लामी से तुझे कमर न झुकानी पड़े।
सादी शीराज़ी
सलोक
फ़रीदा राती सोवह खट्ट डीहे पिटहं पेट कूँ
फ़रीदा राती सोवह खट्ट डीहे पिटहं पेट कूँजा तउं खट्टन वेल तडाहीं ते सउं रहआ
बाबा फ़रीद
दोहा
नई रीति या पीत की पहलें सब सुख देह
नई रीति या पीत की पहलें सब सुख देहपाछैं दुख की जील में डार करै तन खेह
बरकतुल्लाह पेमी
सवैया
मुस्कान माधुरी - मैन-मनोहर वन बजै सु सजे तन सोहत पीत पटा है
मैन-मनोहर वन बजै सु सजे तन सोहत पीत पटा हैयौ दमकै चमकै झमकै दुति दामिनि की मनौ स्याम घटा है
