आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "saahib-jii"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "saahib-jii"
दोहरा
साहिब जी सुल्तान जी तुम बड़े गरीब-नवाज
साहिब जी सुल्तान जी तुम बड़े गरीब-नवाजअपना कर के राखियो सो हाथ गहे की लाज
अज्ञात
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
नमी-दानम बुलंद-ओ-पस्त शब जाए कि मन बूदमब-शक्ल-ए-यार हर शय गश्त शब जाए कि मन बूदम
अब्दुल हादी काविश
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "saahib-jii"
पद
सावन - पिय बिन बिरहिन बावरी जिय जस कसकत हूल
पिय बिन बिरहिन बावरी जिय जस कसकत हूलसूल उठै पति पीर की धन संपत सुख धूल
तुलसी साहिब हाथरस वाले
ना'त-ओ-मनक़बत
ख़्वाजा जी महाराजा जी तुम बड़ो ग़रीब नवाज़अपना कर के राखियो तोहे बाँह पकड़े की लाज
अज्ञात
अरिल्ल
अरिल छंद - खुब साहब सों प्रीति सुरति जो लावई
खुब साहब सों प्रीति सुरति जो लावईअलह इमान सों नूर कसब तब पावई
गुलाल साहब
कुंडलिया
जो साहेब का लाल है सो पावैगा लाल
जो साहेब का लाल है सो पावैगा लालसो पावैगा लाल जाइ के गोता मारै
पलटू साहेब
पद
ककहरा - भभ्भा भगी सुरति घट माहिँ जाय जो देखा भाई
भभ्भा भगी सुरति घट माहिँ जाय जो देखा भाईसुखमनि सेज सँवारि सुन्नी में सुरति लगाई
तुलसी साहिब हाथरस वाले
कुंडलिया
जो मैं हारौं राम की जो जीतों तौ राम
जो मैं हारौं राम की जो जीतों तौ रामजो जीतों तौ राम राम से तन मन लावौं
पलटू साहेब
शबद
उपदेश - मोहिं राखो जी अपनी सरण
मोहिं राखो जी अपनी सरण मोहिं राखो जी अपनी सरणअपरम्पार पार नहिं तेरो काह कहों का करन
भीखा साहेब
शबद
उपदेश - प्रभु जी नहिं आवत मोहिं होस
प्रभु जी नहिं आवत मोहिं होसराम नाम मन में नहिं आवत काकर करों भरोस
भीखा साहेब
शबद
उपदेश का अंग - मन में निर्गुन गति जो आवै
मन में निर्गुन गति जो आवैहानि न होय जीव कबहीं, गगन मँडल घर छावै
गुलाल साहब
अरिल्ल
अरिल छंद - याही कहन हमारि जो कोऊ मानई
याही कहन हमारि जो कोऊ मानईतातें सदा हजूर सही जौ ठानई
गुलाल साहब
शबद
भेद का अंग - जो पैं साँची लगन हिय आवै
जो पैं साँची लगन हिय आवैकाटे सकल करम के फंदा आनँदपुर घर छावै
गुलाल साहब
अरिल्ल
अरिल छंद - ऐसा बचन हमार सत्त जो मानिया
ऐसा बचन हमार सत्त जो मानियाचेत करहु नर आपु बृथा सब जानिया
गुलाल साहब
शबद
मन - सो बनिया जो मन को तौले सो बनिया जो मन को तौलै
सो बनिया जो मन को तौले सो बनिया जो मन को तौलैमनहिं के भीतर बसी बजार मनहीं आपु खरीदनहार






