आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "shah abdul lateef bhitai mazhar ansari ebooks"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "shah abdul lateef bhitai mazhar ansari ebooks"
सूफ़ी उद्धरण
जिन लोगों ने महबूब को देखा है, उन्होंने तमाम मज़हब छोड़ दिए हैं।
जिन लोगों ने महबूब को देखा है, उन्होंने तमाम मज़हब छोड़ दिए हैं।
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
अन्य परिणाम "shah abdul lateef bhitai mazhar ansari ebooks"
सूफ़ी उद्धरण
सूलूक (आध्यात्मिक मार्ग) का यात्री अपना सफ़र जारी रखता है।
सूलूक (आध्यात्मिक मार्ग) का यात्री अपना सफ़र जारी रखता है।
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
सूफ़ी उद्धरण
अपने मज़हब को समझो और फिर रूहानी रास्ते पर चलो।
अपने मज़हब को समझो और फिर रूहानी रास्ते पर चलो।
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
सूफ़ी उद्धरण
ख़ुद को मिटाना बंदे को अज़मत की बुलंदी पर पहुँचा देता है।
ख़ुद को मिटाना बंदे को अज़मत की बुलंदी पर पहुँचा देता है।
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
सूफ़ी उद्धरण
इंसान को परिंदों से भाईचारे का सबक़ सीखना चाहिए, जो आम तौर पर मुहब्बत और भाईचारे के महान जज़्बे के तहत झुंड में रहते हैं।
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
सूफ़ी उद्धरण
इंसान को हर हाल में नर्मी बरतनी चाहिए और दिल में बसने वाली ख़ुदाई आवाज़ यानी ज़मीर की सदा की रहनुमाई में रहना चाहिए। अपने अंदर के मुंसिफ़ को तख़्त पर बिठाओ। दुनियावी क़ाज़ी से फ़रियाद क्यों करते हो?
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
सूफ़ी उद्धरण
रोज़मर्रा की रस्मी नमाज़ वह नहीं है, जो इंसान को हक़ीक़त की पहचान करवाती है, बल्कि यह तो उसे ग़ुरूर की तरफ ले जाती है।
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
सूफ़ी उद्धरण
इंसान की ज़िंदगी महज़ एक साया है, जिस की सारी शान-ओ-शौक़त एक दिन मिट जाएगी। इसलिए ये ज़रूरी है कि इंसान ख़ुदा के लिए अपनी ज़िंदगी दे दे, उस की तलाश में लग जाए और उस का सच्चा बंदा बनजाए।
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
सूफ़ी उद्धरण
जिन्होंने महबूब को देख लिया है, उन्होंने तमाम मज़ाहिब को छोड़ दिया है।
जिन्होंने महबूब को देख लिया है, उन्होंने तमाम मज़ाहिब को छोड़ दिया है।
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
ना'त-ओ-मनक़बत
आप ही की ज़ात वो है ये कहा जाए सबमज़हर-ए-नूर-ए-ख़ुदा सल्ले-अ'ला सल्ले-अ'ला
अब्दुल लतीफ़ शौक़
सूफ़ी उद्धरण
ज़ात-ए-इलाही के हुस्न की एक झलक से एक अंधी इंसानी बीनाई लुत्फ़-अंदोज़ नहीं हो सकती।
ज़ात-ए-इलाही के हुस्न की एक झलक से एक अंधी इंसानी बीनाई लुत्फ़-अंदोज़ नहीं हो सकती।