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सूफ़ी लेख
रसखान के वृत्त पर पुनर्विचार
रसखान के जीवनवृत्त पर सर्वप्रथम प्रकाश डालने का श्रेय श्री किशोरीलाल गोस्वामी को है। वे रसखान
कृष्णचन्द्र वर्मा
सूफ़ी लेख
राष्ट्रीय जीवन में सूरदास, श्री शान्ता कुमार
भारतीय लोक-संस्कृति और परम्परा को एक ऊँची पीठिका पर आसीन करने में संतप्रवर सूरदास और उसके
सूरदास : विविध संदर्भों में
सूफ़ी लेख
भ्रमर-गीतः गाँव बनाम नगर, डॉक्टर युगेश्वर
नागर सिंधु सभ्यता के बावजूद भारतीय नगरी नहीं ग्रामीण है। पूरा भारतीय साहित्य गाँव उन्मुख हैं।
सूरदास : विविध संदर्भों में
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सूफ़ी लेख
प्रणति, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
सूरदास महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के शिष्य थे। ऐसा कहा जाता है कि पहले वे दैन्यसूचक और
सूरदास : विविध संदर्भों में
सूफ़ी लेख
सूर की लोकमंगल-भावना, डॉक्टर भगवती प्रसाद सिंह
सूरदास कृष्ण की लोकरंजक लीलाओं के चिन्तन तथा गान में निरन्तर मग्न रहने वाले भावसिद्ध भक्त
सूरदास : विविध संदर्भों में
सूफ़ी लेख
सूर की सामाजिक सोच, डॉक्टर रमेश चन्द्र सिंह
सूर की सामाजिक सोच क्या थी? क्या वह सोच आज के भारतीय समाज के लिए भी
सूरदास : विविध संदर्भों में
सूफ़ी लेख
सूर की कविता का आकर्षण, डॉक्टर प्रभाकर माचवे
सूरदास के समय में और आज के समय में पाँच सौ वर्षों का व्यवधान है। उनकी
सूरदास : विविध संदर्भों में
सूफ़ी लेख
भ्रमरगीत में सूर की रस-साधना का मूल रहस्य, डॉक्टर गोवर्धन नाथ शुक्ल
सूरसागर का मूल स्रोत महर्षि व्यास की समाधि-भाषा श्रीमद्भागवत ग्रंथ रहा है। काव्यवस्तु के लिए सूर
सूरदास : विविध संदर्भों में
राग आधारित पद
राग धनाश्री - व्रज में आज एक कुमारि
ब्रज में आज एक कुमारितपनरिपु चल जासु पति हिय अन्त हीन विचार
सूरदास
राग आधारित पद
राग धनाश्री - बालम बिलम बिदेश रहो री
बालम बिलम बिदेश रहो रीभूषणपितु पितु सेनापति पितु ता अरि अंग दहो री
सूरदास
राग आधारित पद
राग धनाश्री - ब्रज की कही कहा कहु बाते
ब्रज की कही कहा कहु बातेगिरितनयापति भूषण जैसे विरह जरी दिनराते
सूरदास
राग आधारित पद
राग धनाश्री - हरि कत भये ब्रज के चोर
हरि कत भये ब्रज के चोरतुम्हरे मधुप वियोग राधे मदन के झकझोर


