परिणाम "dushman"
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जहाँ गर हो दुश्मन है क्या फ़िक्र-ओ-ग़मअगर ग़म-गुसारी पे ग़म-ख़्वार हो
उस सितम-पेशा मेहर दुश्मन कीमेरे ऊपर अगर जफ़ा है ये
पहचानता वो अब नहीं दुश्मन को दोस्त सेकिस क़ैद से असीर-ए-मोहब्बत रिहा हुआ
कहता हूँ ये उन के तसव्वुर से ऐ दुश्मन-ए-हस्ती-ए-वहमीजब ठहरा मैं इक मौज-ए-रवाँ ख़त-ए-मौज की तरह मिटा दे मुझे
क़ातिल रहबर क़ातिल रहज़नदिल सा दोस्त न दिल सा दुश्मन
किया बर्बाद अरमानों ने दिल कोमिरे दुश्मन तो घर के फ़र्द निकले
वहीं आ बैठा उठ कर उधर सेमिला है घर मिरा दुश्मन के घर से
मोहब्बत इब्तिदा में कुछ नहीं मा’लूम होती हैमगर फिर दुश्मन-ए-ईमान-ओ-दीं मालूम होती है
कल ग़ैर के धोके में वो ई'द मिले हम सेखोली भी तो दुश्मन ने तक़दीर-ए-हम-आग़ोशी
कल ग़ैर के धोके में वो ई’द मिले हम सेखोली भी तो दुश्मन ने तक़दीर-ए-हम-आग़ोशी
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