आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "faran karachi shumara number 008 mahirul qadri magazines"
शेर के संबंधित परिणाम "faran karachi shumara number 008 mahirul qadri magazines"
शे'र
फ़क़ीर-ए-‘कादरी’ जो देखते हैं चश्म-ए-बीना सेतो बंदे को ख़ुदा कहने की जुर्अत आ ही जाती है
ग़ुलाम रसूल क़ादरी
शे'र
माहिरउल क़ादरी
शे'र
माहिरउल क़ादरी
शे'र
कह दिया फ़िरऔ’न ने भी मैं ख़ुदा कर के ख़ुदीहो के बे-ख़ुद जब कहे इंकार की हाजत नहीं
किशन सिंह आरिफ़
शे'र
नामा-बर ख़त दे के उस को लफ़्ज़ कुछ मत बोलियोदम-ब-ख़ुद रहियो तेरी तक़रीर की हाजत नहीं
किशन सिंह आरिफ़
शे'र
उ’मूमन ख़ाना-ए-दिल में मोहब्बत आ ही जाती हैख़ुदी ख़ुद-ए’तिमादी में बदल जाये तो बंदों को
ग़ुलाम रसूल क़ादरी
शे'र
नई है बिलकुल नई है साहब ये दास्ताँ जो सुना रहा हूँअभी अभी ही बना हूँ बंदा पहले मैं भी ख़ुदा रहा हूँ
ग़ुलाम रसूल क़ादरी
शे'र
ख़ुदी ख़ुद-ए’तिमादी में बदल जाये तो बंदों कोख़ुदा से सरकशी करने की नौबत आ ही जाती है
ग़ुलाम रसूल क़ादरी
शे'र
हस्ती की इस किताब के मा’नों पे ख़ूब ग़ौर करलाखों क़ुरआन हैं निहाँ रिंद की कायनात में