आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "farogh e urdu shumara number 012 001 mohammad husain shams alvi magazines"
शेर के संबंधित परिणाम "farogh e urdu shumara number 012 001 mohammad husain shams alvi magazines"
शे'र
बहार आई है गुलशन में वही फिर रंग-ए-महफ़िल हैकिसी जा ख़ंदा-ए-गुल है कहीं शोर-ए-अ’नादिल है
शम्स फ़िरंगी महल्ली
शे'र
बहार आई है गुलशन में वही फिर रंग-ए-महफ़िल हैकिसी जा ख़ंदा-ए-गुल है कहीं शोर-ए-अ’नादिल है
शम्स फ़िरंगी महल्ली
शे'र
सिसकते होंगे लाखों सैंकड़ों बे-दम पड़े होंगेसुन ऐ क़ासिद यही अच्छा निशान-ए-कू-ए-क़ातिल है
शम्स फ़िरंगी महल्ली
शे'र
फ़रोग़-ए-हसरत-ओ-ग़म से जिगर में दाग़ रखता हूँमिरे गुलशन की ज़ीनत दौर-ए-हंगाम-ए-ख़िज़ाँ तक है
वली वारसी
शे'र
पस-ए-मुर्दन इरादा दिल में था जो कू-ए-क़ातिल कालहद में ख़ुश हुआ मैं नाम सुनकर पहली मंज़िल का