परिणाम "jaam-e-mai-e-jam-jam"
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मय से चुल्लू भर दे साक़ी जाम का क्या इंतिज़ारअब्र आया झूम कर मौक़ा नहीं ताख़ीर का
तिरा जाम जाम-ए-कौसर तिरा मय-कदा है जन्नतमिरे हाल पे करम कर मिरी तिश्नगी बुझा दे
ज़िंदगी को बेच डाला बे-ख़ुदी के जाम परएक ही साग़र से दिल की तिश्नगी जाती रही
इ’श्क़ था अपने ज़ो'म में इ’श्क़ को ज़िद बनी रहीक़िस्स: हुआ न मुख़्तसर उम्र तमाम हो गई
क़ातिल को है ज़ो'म-ए-चारा-गरी अब दर्द-ए-निहाँ की ख़ैर नहींवो मुझ पे करम फ़रमाने लगे शायद मिरी जाँ की ख़ैर नहीं
मुरीद-ए-पीर-ए-मय-ख़ाना हुए क़िस्मत से ऐ नासेहन झाड़ें शौक़ में पलकों से हम क्यूँ सहन-ए-मय-ख़ाना
नहीं देता जो मय अच्छा न दे तेरी ख़ुशी साक़ीप्याले कुछ हमेशा ताक़ पर रखे नहीं रहते
गए मय पीते हुए आलम-ए-असरार से हममस्त जन्नत में गए ख़ान:-ए-ख़ुमार से हम
वफ़ूर-ए-बे-ख़ुदी-ए-बज़्म-ए-मय न पूछो रातकोई ब-जुज़ निगह-ए-यार होशियार न था
बिकी मय बहुत फ़स्ल-ए-गुल में गराँजो सच पूछो फिर भी ये सस्ती रही
नज़र-अफ़ज़ोई-ए-शम-ए-तजल्ली ऐ ज़हे-क़िस्मतकहाँ बज़्म-ए-जमाल उन की कहाँ परवानगी अपनी
इक क़तरा-ए-मय दे कर वहदत में डुबोया हैसाक़ी ने मिरी कश्ती दरिया में रवाँ कर दी
ऐ शम-ए-दिल-अफ़रोज़ शब-तार-मोहब्बततुझ से ही है ये गर्मी-ए-बाज़ार-ए-मोहब्बत
दिखा मुझ को दीदार ऐ गुल-एज़ारतुझे अपने बाग़-ए-इरम की क़सम
ऐ शब-ए-फ़ुर्क़त न आई तुझ को शर्मग़ैर के घर जा के मुँह काला किया
ऐ असीरान-ए-क़फ़स आने को है फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँचार-दिन में और गुलशन की हवा हो जाएगी
ऐ बहार-ए-गुलशन-ए-नाज़-ओ-नज़ाकत हर तरफ़तेरे आने से हुई है और भी बुस्ताँ में धूम
सदक़े ऐ क़ातिल तिरे मुझ तिश्ना-ए-दीदार कीतिश्नगी जाती रही आब-ए-दम-ए-शमशीर से
ऐ ज़ब्त-ए-दिल ये कैसी क़यामत गुज़र गईदीवानगी में चाक गरेबान हो गया
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