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शे'र
पस-ए-मुर्दन इरादा दिल में था जो कू-ए-क़ातिल कालहद में ख़ुश हुआ मैं नाम सुनकर पहली मंज़िल का
ग़ाफ़िल लखनवी
शे'र
लाया तुम्हारे पास हूँ या पीर अल-ग़ियासकर आह के क़लम से मैं तहरीर अल-ग़ियास
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
शे'र
तिरा तर्क-ए-सितम भी इक सितम है ये सितम कैसातिरी तर्क-ए-जफ़ा भी इक जफ़ा है ये जफ़ा क्यूँ है
मुज़तर ख़ैराबादी
शे'र
क्यूँ-कर न क़ुर्ब-ए-हक़ की तरफ़ दिल मिरा कीजिएगर्दन असीर-ए-हल्क़ा-ए-हबल-उल-वरीद है
बेदम शाह वारसी
शे'र
आप की मज्लिस-ए-आ’ली में अ’लर्रग़्म रक़ीबब-इजाज़त ये गुनहगार उठे और बैठे
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
'इश्क़ वही तड़प वही हुस्न वही अदा वहीहुस्न की इब्तिदा वही 'इश्क़ की इंतिहा वही
शाह वलीउर्रहमान जमाली
शे'र
महफ़िल इ’श्क़ में जो यार उठे और बैठेहै वो मलका कि सुबुक-बार उठे और बैठे
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
नौ ख़त तो हज़ारों हैं गुलिस्तान-ए-जहाँ मेंहै साफ़ तो यूँ तुझ सा नुमूदार कहाँ है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
नहीं सुनता नहीं आता नहीं बस मेरा चलता हैनिकल ऐ जान तू ही वो नहीं घर से निकलता है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
वही इंसान है 'एहसाँ' कि जिसे इल्म है कुछहक़ ये है बाप से अफ़्ज़ूँ रहे उस्ताद का हक़
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
वही इंसान है 'एहसाँ' कि जिसे इ’ल्म है कुछहक़ ये है बाप से अफ़्ज़ूँ रहे उस्ताद का हक़