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तेरे मुखड़े को यूँ तके है दिलचाँद के जों रहे चकोर लगा
न रहा इंतिज़ार भी ऐ यासहम उमीद-ए-विसाल रखते थे
गुलों की तरह चाक का ऐ बहारमुहय्या हर इक याँ गरेबान है
तेरे वा'दों का ए'तिबार किसेगो कि हो ताब-ए-इंतिज़ार किसे
हूँ तीर-ए-बला का मैं निशान:शमशीर-ए-जफ़ा का मैं सिपर हूँ
हिजाब-ए-रुख़-ए-यार थे आप ही हमखुली आँख जब कोई पर्दा न देखा
बुत-ए-काफ़िर की बे-मुरव्वतियाँये हमें सब ख़ुदा दिखाता है
एक ईमान है बिसात अपनीन इबादत न कुछ रियाज़त है
सर्फ़-ए-ग़म हम ने नौजवानी कीवाह क्या ख़ूब ज़िंदगानी की
लेकिन उस को असर ख़ुदा जानेन हुआ होगा या हुआ होगा
ढूँढते हैं आप से उस को परेशैख़ साहिब छोड़ घर, बाहर चले
नाला करना कि आह करनादिल में 'असर' उस के राह करना
कहूँ क्या ख़ुदा जानता है सनममोहब्बत तिरी अपना ईमान है
जान से हो गए बदन ख़ालीजिस तरफ़ तू ने आँख भर देखा
किधर की ख़ुशी कहाँ की शादीजब दिल से हवस ही सब उड़ा दी
कर के दिल को शिकार आँखों मेंघर करे है तो यार आँखों में
मानूस न था वो बुत कसो सेटुक राम किया ख़ुदा-ख़ुदा कर
क्या कहे वो कि सब हुवैदा हैशान तेरी तिरी किताब के बीच
किया सैर सब हम ने गुलज़ार-ए-दुनियागुल-ए-दोस्ती में अजब रंग-ओ-बू है
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