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शे'र
अब्दुल हादी काविश
शे'र
उफ़-रे बाद-ए-जोश-ए-जवानी आँख न उन की उठती थीमस्ताना हर एक अदा थी हर इ’श्वा मस्ताना था
बेदम शाह वारसी
शे'र
जब आग धदकती हो उस पर मत छीटियो तेल ख़ुदा रा तुमक्या दिल की ख़ुशी को पूछो हो ऐ यारो इक नाशाद सती
ग़ुलाम नक़्शबंद सज्जाद
शे'र
किया जो मुझ तरफ़ गुल-रू नज़र आहिस्ता आहिस्तावो पहुँची बुलबुल-ए-दिल कूँ ख़बर आहिस्ता आहिस्ता
तुराब अली दकनी
शे'र
देखे जो यक-ब-यक गुल-रू तुम्हारी बे-हिजाबी हममिसाल-ए-बुलबुल-ए-शैदा किए अपनी ख़राबी हम
तुराब अली दकनी
शे'र
कामिल शत्तारी
शे'र
इस आईना-रू के वस्ल में भी मुश्ताक़-ए-बोस-ओ-कनार रहेऐ आ’लम-ए-हैरत तेरे सिवा ये भी न हुआ वो भी न हुआ