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शे'र
हुस्न-मह्व-ए-रंग-ओ-बू है इ’श्क़ ग़र्क़-ए-हाय-ओ-हूहर गुलिस्ताँ उस तरफ़ है हर बयाबाँ इस तरफ़
ज़हीन शाह ताजी
शे'र
अहक़र बिहारी
शे'र
मोहब्बत जब हुई ग़ालिब नहीं छुपती छुपाने सेफुग़ान-ओ-आह-ओ-नाला है तिरे आ’शिक़ का नक़्क़ारा
शाह तुराब अली क़लंदर
शे'र
उसी का है रंग यासमन में उसी की बू-बास नस्तरन मेंजो खड़के पत्ता भी इस चमन में ख़याल आवाज़ आश्ना कर
अमीर मीनाई
शे'र
वह्म है शक है गुमाँ है बाल से बारीक हैइस से बेहतर और मज़मून-ए-कमर मिलता नहीं
मिर्ज़ा फ़िदा अली शाह मनन
शे'र
इतनी बात न बूझी लोगाँ आप निभाता करी सो कुएइ’ल्म क़ुदरत जिस थोरा होवे की मजबूर विचारा होए
शाह अली जीव गामधनी
शे'र
ख़ुद अदा मरती है जिस पर वो अदा कुछ और हैहै वफ़ा भी जिस पे सदक़े वो जफ़ा कुछ और है
तसद्दुक़ अ’ली असद
शे'र
हश्र के दिन इम्तिहाँ पेश-ए-ख़ुदा दोनों का हैलुत्फ़ है उनकी जफ़ा मेरी वफ़ा से कम रहे