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शे'र
ये है मुख़्तसर फ़साना मिरी ज़िंदगी का नासेहग़म-ए-'आशिक़ी फ़क़त था ग़म-ए-दो-जहाँ से पहले
अफ़क़र मोहानी
शे'र
क्या इन आहों से शब-ए-ग़म मुख़्तसर हो जाए गीये सह सेहर होने की बातें हैं सेहर हो जाए गी
क़मर जलालवी
शे'र
क्यूँ-कर न क़ुर्ब-ए-हक़ की तरफ़ दिल मिरा कीजिएगर्दन असीर-ए-हल्क़ा-ए-हबल-उल-वरीद है
बेदम शाह वारसी
शे'र
किया जो मुझ तरफ़ गुल-रू नज़र आहिस्ता आहिस्तावो पहुँची बुलबुल-ए-दिल कूँ ख़बर आहिस्ता आहिस्ता
तुराब अली दकनी
शे'र
बेदम शाह वारसी
शे'र
बेदम शाह वारसी
शे'र
मुझे इ’श्क़ ने ये पता दिया कि न हिज्र है न विसाल हैउसी ज़ात का मैं ज़ुहूर हूँ ये जमाल उसी का जमाल है
अज़ीज़ सफ़ीपुरी
शे'र
शम्स साबरी
शे'र
हाज़िर है बज़्म-ए-यार में सामान-ए-ऐ’श सबअब किस का इंतिज़ार है 'अकबर' कहाँ हो तुम
शाह अकबर दानापूरी
शे'र
लाया तुम्हारे पास हूँ या पीर अल-ग़ियासकर आह के क़लम से मैं तहरीर अल-ग़ियास
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
शे'र
हिज्र के आलाम से छूटूं ये क़िस्मत में नहींमौत भी आने का गर वा’दा करे बावर ना हो