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जला हूँ आतिश-ए-फ़ुर्क़त से मैं ऐ शो'ला-रू याँ तकचराग़-ए-ख़ाना मुझ को देख कर हर शाम जलता है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
वो बहर-ए-हुस्न शायद बाग़ में आवेगा ऐ 'एहसाँ'कि फ़व्वारा ख़ुशी से आज दो-दो गज़ उछलता है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
ऐ ग़म मुझे याँ अहल-ए-त’अय्युश ने है घेराइस भीड़ में तु ऐ मिरे ग़म-ख़्वार कहाँ है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
महफ़िल-ए-'इश्क़ में जो यार उठे और बैठेहै वो मलका कि सुबुक-बार उठे और बैठे
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
सदा ही मेरी क़िस्मत जूँ सदा-ए-हल्क़ा-ए-दर हैअगर मैं घर में जाता हूँ तो वो बाहर निकलता है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
आप की मज्लिस-ए-’आली में ’अलर्रग़्म रक़ीबब-इजाज़त ये गुनहगार उठे और बैठे
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
नहीं सुनता नहीं आता नहीं बस मेरा चलता हैनिकल ऐ जान तू ही वो नहीं घर से निकलता है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
वही इंसान है 'एहसाँ' कि जिसे 'इल्म है कुछहक़ ये है बाप से अफ़्ज़ूँ रहे उस्ताद का हक़
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
वही इंसान है 'एहसाँ' कि जिसे 'इल्म है कुछहक़ ये है बाप से अफ़्ज़ूँ रहे उस्ताद का हक़
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
जिन से कि हो मरबूत वही तुम को है मैमूनइंसान की सोहबत तुम्हें दरकार कहाँ है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
किसी का साथ सोना याद आता है तो रोता हूँमिरे अश्कों की शिद्दत से सदा गुल-तकिया गलता है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
नौ-ख़त तो हज़ारों हैं गुलिस्तान-ए-जहाँ मेंहै साफ़ तो यूँ तुझ-सा नुमूदार कहाँ है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शे'र
नासेहो गर न सुनूँ मैं मिरी क़िस्मत का क़ुसूरतुम ने इरशाद किया जो कि है इरशाद का हक़