परिणाम "paak-daaman"
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पाक-बाज़ी अपनी पैग़ाम-ए-तलब थी इश्क़ मेंधो के दाग़-ए-तोहमत-ए-हस्ती सफ़र दरकार था
ब-तुफ़ैल-ए-दामन-ए-मुर्तज़ा मैं बताऊं क्या मुझे क्या मिलाकि अ’ली मिले तो नबी मिले जो नबी मिले तो ख़ुदा मिला
हमेशा दामन-ए-गुल मिस्ल-ए-शबनमहुआ मस्कन मिरे तिफ़्ल-ए-नेन का
हर गुल है चाक-दामन हर ग़ुंचा दिल-ए-गिरफ्ताऐ बाग़बान-ए-क़ुदरत फ़स्ल-ए-बहार क्या है
ऐ क़ासिद-ए-अश्क़-ओ-पैक सबा उस तक न पयाम-ओ-ख़त पहुँचातुम क्या करो हाँ क़िस्मत का लिखा ये भी न हुआ वो भी न हुआ
क़दम क़दम पे रही एक याद दामन-गीरतुम्हारी बज़्म में ये मुझ को बे-ख़ुदी न हुई
कहाँ दामन-ए-हुस्न आशिक़ से अटकागुल-ए-दाग़-ए-उल्फ़त में काँटा नहीं है
मैं फ़िदा-ए-मुर्शिद-ए-पाक हूँ दर-ए-बारगाह की ख़ाक हूँवो समा के मुझ में ये कहते हैं कि 'अज़ीज़' ग़ैर-मुहाल है
आज उनके दामन पर अश्क मेरे ढलते हैंग़म के तेज़-रू धारे रास्ते बदलते हैं
भाग निकला था जो तूफ़ाँ से छुड़ा कर दामनसर-ए-साहिल वही डूबा हुआ कश्ती में मिला
उस के होते ख़ुदी से पाक हूँ मैंख़ूब है बे-ख़ुदी नहीं जाती
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