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शे'र
'इश्क़ की आईना-दारी जज़्बा-ए-कामिल में हैवो मिरे दिल में है पहले से जो उन के दिल में है
निहाद सण्डेलवी
शे'र
बेशक ख़ुदा बने जो ‘फ़ना’ तोड़े अब्दियतख़ुद-बीनियों का अपनी जो पाया शिकस्त हो
सुलेमान शिकोह गार्डनर
शे'र
क्या ग़म जो टूट जाएँ जिगर, जाँ, कलेजा, दिलपर तेरी चाह की न तमन्ना शिकस्त हो
सुलेमान शिकोह गार्डनर
शे'र
लाया तुम्हारे पास हूँ या पीर अल-ग़ियासकर आह के क़लम से मैं तहरीर अल-ग़ियास
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
शे'र
अज़ीज़ सफ़ीपुरी
शे'र
फ़स्ल-ए-गुल आई या अजल आई क्यों दर-ए-ज़िंदाँ खुलता हैया कोई वहशी और आ पहुंचा या कोई क़ैदी छूट गया
फ़ानी बदायूँनी
शे'र
मौसम-ए-होली है दिन आए हैं रंग और राग केहम से तुम कुछ माँगने आओ बहाने फाग के
शैख़ ज़ुहूरुद्दिन हातिम
शे'र
जिगर मुरादाबादी
शे'र
मय-ख़ाना में ख़ुदी को नहीं दख़्ल शैख़-जीबे-ख़ुदी हुआ है जिन ने पिया है वो जाम-ए-ख़ास