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शे'र
अदा से हाथ उठने में गुल राखी जो हिलते हैंकलेजे देखने वालों के क्या क्या आह छिलते हैं
नज़ीर अकबराबादी
शे'र
हवस जो दिल में गुज़रे है कहूँ क्या आह मैं तुम कोयही आता है जी में बन के बाम्हन आज तो यारो
नज़ीर अकबराबादी
शे'र
कुछ भीगी तालैं होली की कुझ नाज़ अदा के ढंग भरेदिल भूले देख बहारों को और कानों में आहंग भरे
नज़ीर अकबराबादी
शे'र
लफ़्ज़-ए-उल्फ़त की मुकम्मल शर्ह इक तेरा वजूदआ'शिक़ी में तोड़ डालीं ज़ाहिरी सारी क़ुयूद
अज़ीज़ वारसी देहलवी
शे'र
हरे कपड़े पहन कर फिर न जाना यार गुलशन मेंगुलू-ए-शाख़-ए-गुल से ख़ून टपकेगा शहादत का
मोहम्मद अकबर वार्सी
शे'र
गुनाह करता है बरमला तू किसी से करता नहीं हया तूख़ुदा को क्या मुंह दिखाएगा तू ज़रा ऐ बे-हया हया कर
फ़क़ीर मोहम्मद गोया
शे'र
गुनाह करता है बरमला तू किसी से करता नहीं हया तूख़ुदा को क्या मुंह दिखाएगा तू ज़रा ऐ बे-हया हया कर