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शे'र
वो तूर वाली तिरी तजल्ली ग़ज़ब की गर्मी दिखा रही हैवहाँ तो पत्थर जला दिए थे यहाँ कलेजा जला रही है
मुज़्तर ख़ैराबादी
शे'र
मेरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा,मुझे ज़िंदगी का अलम नहींजिसे तेरे ग़म से हो वास्ता वो ख़िज़ाँ बहार से कम नहीं
शकील बदायूँनी
शे'र
सदिक़ देहलवी
शे'र
शकील बदायूँनी
शे'र
ये है मुख़्तसर फ़साना मिरी ज़िंदगी का नासेहग़म-ए-आशिक़ी फ़क़त था ग़म-ए-दो-जहाँ से पहले
अफ़क़र मोहानी
शे'र
करें आह-ओ-फ़ुग़ाँ फोड़ें-फफोले इस तरह दिल केइरादा है कि रोएँ ई’द के दिन भी गले मिल के