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अहक़र बिहारी
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हम गिरफ़्तारों को अब क्या काम है गुलशन से लेकजी निकल जाता है जब सुनते हैं आती है बहार
मिर्ज़ा मज़हर जान-ए-जानाँ
शे'र
मिस्ल-ए-गुल बाहर गया गुलशन से जब वो गुल-एज़ारअश्क-ए-ख़ूनी से मेरा तन तर-ब-तर होने लगा
किशन सिंह आरिफ़
शे'र
मिस्ल-ए-गुल बाहर गया गुलशन से जब वो गुल-ए'ज़ारअश्क-ए-ख़ूनी से मेरा तन तर-ब-तर होने लगा
किशन सिंह आरिफ़
शे'र
कोई रश्क-ए-गुलिस्ताँ है तो कोई ग़ैरत-ए-गुलशनहुए क्या क्या हसीं गुलछर्रः पैदा आब-ओ-गिल से
शाह अकबर दानापूरी
शे'र
नसीम-ए-सुब्ह गुलशन में गुलों से खेलती होगीकिसी की आख़िरी हिचकी किसी की दिल-लगी होगी
सीमाब अकबराबादी
शे'र
सुब्ह नहीं बे-वज्ह जलाए लाले ने गुलशन में चराग़देख रुख़-ए-गुलनार-ए-सनम निकला है वो लाल: फूलों का
शाह नसीर
शे'र
सुब्ह नहीं बे-वज्ह जलाए लाले ने गुलशन में चराग़देख रुख़-ए-गुलनार-ए-सनम निकला है वो लाला फूलों का
शाह नसीर
शे'र
लगा दी आग उन के शो'ला-ए-आरिज़ ने गुलशन मेंज़र-ए-गुल बन गईं चिंगारियाँ फूलों के दामन में
हसन इमाम वारसी
शे'र
ग़ज़ब की चाल गुलशन में चला है बाग़बाँ 'मोहसिन'इसी का ये नतीज: है कि पामाल-ए-सऊबत हूँ
शाह मोहसिन दानापुरी
शे'र
तुम न जाओ ज़ीनत-ए-गुलशन तुम्हारे दम से हैतुम चले जाओगे तो गुलशन में क्या रह जाएगा
पुरनम इलाहाबादी
शे'र
रियाज़ ख़ैराबादी
शे'र
कम नहीं गुलशन में शबनम गुल-बदन गुल-पैरहनग़ुस्ल कर मल-मल के गर आब-ए-रवाँ मिलता नहीं
अकबर वारसी मेरठी
शे'र
बहार आई है गुलशन में वही फिर रंग-ए-महफ़िल हैकिसी जा ख़ंदा-ए-गुल है कहीं शोर-ए-अ’नादिल है