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शे'र
जल्वा-ए-हर-रोज़ जो हर सुब्ह की क़िस्मत में थाअब वो इक धुँदला सा ख़्वाब-ए-दोश है तेरे बग़ैर
सीमाब अकबराबादी
शे'र
जब तक एक हसीं मकीं था दिल में हर-सू फूल खिले थेवो उजड़ा तो गुलशन उजड़ा और हुआ आबाद नहीं है
बेख़ुद सुहरावर्दी
शे'र
उफ़-रे बाद-ए-जोश-ए-जवानी आँख न उन की उठती थीमस्ताना हर एक अदा थी हर इ’श्वा मस्ताना था
बेदम शाह वारसी
शे'र
हर ज़र्रा उस की मंज़िल सहरा हो या हो गुलशनक्यूँ बे-निशाँ रहे वो तेरा जो बे-निशाँ है
हैरत शाह वारसी
शे'र
दिल में जो रहते थे उम्मीद की दुनिया हो करवो चले जाते हैं क्यूँ दाग़-ए-तमन्ना हो कर
हैरत शाह वारसी
शे'र
रुख़ पे हर सूरत से रखना गुल-रुख़ाँ ख़त का है कुफ़्रदेखो क़ुरआँ पर न रखियो बोस्ताँ बहर-ए-ख़ुदा
शाह नसीर
शे'र
रुख़ पे हर सूरत से रखना गुल-रुख़ाँ ख़त का है कुफ़्रदेखो क़ुरआँ पर न रखियो बोस्ताँ बहर-ए-ख़ुदा
शाह नसीर
शे'र
शकील बदायूँनी
शे'र
होश न था बे-होशी थी बे-होशी में फिर होश कहाँयाद रही ख़ामोशी थी जो भूल गए अफ़्साना था
बेदम शाह वारसी
शे'र
कहाँ चैन ख़्वाब-ए-अदम में था न था ज़ुल्फ़-ए-यार का ख़यालसो जगा के शोर ने मुझे इस बला में फँसा दिया