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शे'र
हम वस्ल में ऐसे खोए गए फ़ुर्क़त का ज़माना भूल गएसाहिल की ख़ुशी में मौजों का तूफ़ान उठाना भूल गए
कामिल शत्तारी
शे'र
तिरा ग़म सहने वाले पर ज़माना मुस्कुराता हैमगर हर शख़्स की क़िस्मत में तेरा ग़म नहीं होता
अज़ीज़ वारसी देहलवी
शे'र
तिरा ग़म सहने वाले पर ज़माना मुस्कुराता हैमगर हर शख़्स की क़िस्मत में तेरा ग़म नहीं होता
अज़ीज़ वारसी देहलवी
शे'र
हज़ार रंग-ए-ज़माना बदले हज़ार दौर-ए-नशात आएजो बुझ चुका है हवा-ए-ग़म से चराग़ फिर वो जला नहीं है
अफ़क़र मोहानी
शे'र
नामा-बर ख़त दे के उस को लफ़्ज़ कुछ मत बोलियोदम-ब-ख़ुद रहियो तेरी तक़रीर की हाजत नहीं
किशन सिंह आरिफ़
शे'र
मैं समझूँगा कि मेरे दाग़-ए-इस्याँ धुल गए सारेअगर आँसू तिरी चश्म-ए-तग़ाफ़ुल से निकल आया
मुज़तर ख़ैराबादी
शे'र
ख़ून-ए-दिल जितना था सारा वक़्फ़-ए-हसरत कर दियाइस क़दर रोया कि मेरी आँख में आँसू नहीं