आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ziina-e-pechaa.n"
शेर के संबंधित परिणाम "ziina-e-pechaa.n"
शे'र
अदब से सर झुका कर क़ासिद उस के रू-ब-रू जानानिहायत शौक़ से कहना पयाम आहिस्ता आहिस्ता
अज़ीज़ सफ़ीपुरी
शे'र
मोहब्बत में जुदाई का मज़ा 'मुज़्तर' न जाने दूँवो बुलबुल हूँ कि गुल पाऊँ तो पत्ता दरमियाँ रक्खूँ
मुज़तर ख़ैराबादी
शे'र
न जाने कौन से यूसुफ़ का जल्वा मुझ में पिन्हाँ हैज़ुलेख़ा आज तक करती है 'मुज़्तर' इल्तिजा मेरी
मुज़तर ख़ैराबादी
शे'र
बहादुर शाह ज़फ़र
शे'र
ख़ुदा जाने मिरी मिट्टी ठिकाने कब लगे 'मुज़्तर'बहुत दिन से जनाज़ा कूचा-ए-क़ातिल में रक्खा है
मुज़तर ख़ैराबादी
शे'र
ख़ुदा जाने मिरी मिट्टी ठिकाने कब लगे 'मुज़्तर'बहुत दिन से जनाज़ा कूचा-ए-क़ातिल में रक्खा है
मुज़तर ख़ैराबादी
शे'र
ख़ुदा जाने मिरी मिट्टी ठिकाने कब लगे 'मुज़्तर'बहुत दिन से जनाज़ः कूचा-ए-क़ातिल में रक्खा है
मुज़तर ख़ैराबादी
शे'र
रात गए यूँ दिल को जाने सर्द हवाएँ आती हैंइक दरवेश की क़ब्र पे जैसे रक़्क़ासाएँ आती हैं