परिणाम "महरूम"
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ज़िंदगी दर्द से हुई महरूममय-कदा है मगर शराब नहीं
कूचे में गए थे मुतवक़्क़े’ तिरे जो होमुँह डाले गरेबान में महरूम से निकले
दस्त-ए-करम हो जानिब-ए-'मज्ज़ूब' फिर दराज़महरूम आप का कभी साएल नहीं रहा
महरूम हों लताफ़त-ए-फ़ितरत से जो 'नसीर'उन बे-हिसों को शे'र सुनाया न कीजिए
सब को तूने मय-ए-दीदार पिलाई साक़ीएक महरूम हमीं जाते हैं मय-ख़ाने से
एक मूसा ही नहीं रह गए सारे महरूमबरमला किस को 'असद' कब मिरा दीदार हुआ
मस्लहत होगी जो महरूम रखा मय से मुझेफ़े'ल हिकमत से नहीं है तिरा ख़ाली साक़ी
अब जफ़ा से भी हैं महरूम हम अल्लाह अल्लाहइस क़दर दुश्मन-ए-अरबाब-ए-वफ़ा हो जाना
सिर्फ़ मूसा ही नहीं दीद से हैं सब महरूमआज तक किस को खुला आप का दीदार हुआ
हश्र में इतना कहूँगा उस से मैं महरूम-ए-वस्लपाक-दामन तू है मैं क्यूँकर गुनहगारों में हूँ
लुत्फ़-ओ-करम से तेरे महरूम क्यूँ रहूँ मैंया रब करीम तू है या रब ग़फ़ूर तू है
गोश महजूर-ए-पयाम ओ चश्म-ए-महरूम-ए-जमालएक दिल तिस पर ये ना-उम्मीद-वारी हाए हाए
ना-रसा है जो हमेशा वो है नाला किस काजो कि महरूम असर है वो दु'आ किस की है
तू ने क़स्साम-ए-अज़ल ग़ैरों को क्या-क्या कुछ दिया'दाग़' है महरूम उस के नाम का कुछ भी नहीं
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