परिणाम "लन"
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हक़ीक़त रब्बे-अरेनी की समझ करसदा-ए-लन-तरानी चाहता हूँ
रुख़ तिरा किस तरह मैं देख सकूँज़ुल्फ़ है लाम लन-तरानी का
कहीं हो के मूसा कहे रब्बे-अरेनीकहीं लन-तरानी सुना ही दिया है
ज़रा सा तो दिल हूँ मगर शोख़ इतनावही लन-तरानी सुना चाहता हूँ
मूसा बेहोश हुआ कहता था रब्बे-अरेनीआवाज़ लन-तरानी कोह में सुनाई तू ने
लन-तरानी न सुनी आप की उड़-बाज़ों नेन छुपा आप का आख़िर को तजल्ला हम से
अपनी तो ये सदा है उस दर पे रब्बे-अरेनीआवाज़-ए-लन-तरानी किस को सुना रहा है
तालिब से लन-तरानी उन की चली न आख़िरकह कर वलकिन-उन-ज़ुर पर दह उठा रहे हैं
कहीं रब्बे-अरेनी की दी सदा कहीं लन-तरानी सुना गयाजो निहाँ हुआ तो निहाँ हुआ जो ’अयाँ हुआ तो ’अयाँ हुआ
अब अरिनी कहाँ लन-तरानी सुना उस के जल्वे से अच्छा नहीं खेलनाजल्वा-ए-यार-ए-मूसा तमाशा नहीं होश उड़ जाएँगे तूर जल जाएगा
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