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कलाम
ऐ होश-ओ-ख़िरद के मतवालो सर-मस्तों की मस्ती तो देखोतौबा भी बराबर करते हैं सहबा भी बराबर पीते हैं
अनवर फ़र्रूख़ाबादी
कलाम
हाल में अपने मस्त हूँ ग़ैर का होश ही नहींरहता हूँ मैं जहाँ में यूँ जैसे यहाँ कोई नहीं
ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
कलाम
फ़ना बुलंदशहरी
कलाम
होश किसी का भी न रख जल्वा-गाह-ए-नमाज़ मेंबल्कि ख़ुदा को भूल जा सज्दा-ए-बे-नियाज़ में
असग़र गोंडवी
कलाम
पीर नसीरुद्दीन नसीर
कलाम
दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँरोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँ
मिर्ज़ा ग़ालिब
कलाम
सहबा अकबराबादी
कलाम
माहिरउल क़ादरी
कलाम
क्या कहें मिल्लत-ओ-दीं कुफ़्र है ईमाँ अपनापेश-ए-बुत-ए-सज्दा है और दैर है ऐवाँ अपना