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शब-ए-वस्ल तो चैन से गुज़री लेकिनसितम हो गया सुब्ह जाना किसी का
बशर के रूप में इक राज़-ए-किबरिया हूँ मैंसमझ सके न फ़रिश्ते कि और क्या हूँ मैं
यूँही जुदा-जुदा गर ऐ जान-ए-मन रहेगासरसब्ज़ किस तरह फिर दिल का चमन रहेगा
पूछा न कभी तू ने हाल-ए-शब-ए-तन्हाईओ काफ़िर-ए-दीं मुझ से ये बे-ख़बरी क्यूँ है
बाम पर नंगे न आओ तुम शब-ए-महताब मेंचाँदनी पड़ जाएगी मेला बदन हो जाएगा
लिए आ रहा था मैं बेचैन दिल को सुकूँ मिल गया दर पे आने से पहलेमुझ पे तो ख़्वाजा का इतना करम है भरी मेरी झोली फैलाने से पहले
दाग़-हाय दिल अगर मेरे बहारों पर रहेएक दिन सीना मेरा रश्क-ए-चमन हो जाएगा
अज़ मय-'इश्क़-ए-शाह-ए-सरमस्तमबंदा-ए-मुर्तज़ा 'अली हस्तम
दिल तो तुझ पे फ़िदा ऐ जान किए बैठे हैंजाम हम शौक़-ए-शहादत का पिए बैठे हैं
तर्क-ए-मुद्द'आ कर दे ’ऐन-ए-मुद्द’आ हो जाशान-ए-’अब्द पैदा कर मज़हर-ए-ख़ुदा हो जा
दीवाना-ए-परी हूँ न शैदा हूँ हूर कापरवाना हूँ मैं शम'-ए-तजल्ली-ए-तूर का
ख़ुदा रक्खे ये एजाज़-ए-तसव्वुरक़रीब-ए-जल्वा-गाह-ए-तूर हैं हम
फ़स्ल-ए-गुल है शराब पी लीजिएज़िद न कीजे जनाब पी लीजिए
जो बंदा-ए-जान-ए-जानाँ है तो जान जाने से क्या मतलबजो महव-ए-रू-ए-जाना है तो होश आने से क्या मतलब
शहीद-ए-कर्बला-ए-नाज़ से होगी हमें ख़जलतकभी तीर-ए-निगाह से हम जो पहलू को बचाएँगे
मुब्तला-ए-ग़म दिल-ए-नाकाम हैजी का आना मौत का पैग़ाम है
हुस्न-ए-’उरूस-ए-दहर पे जो मर रहा हूँ मैंधोके में नफ़्स-ए-दूँ के मगर आ गया हूँ मैं
कहियो ऐ बाद-ए-सबा मरता है 'आशिक़ तेराकूचा-ए-यार में गर हो कभी जाना तेरा
ख़ताएँ बख़्श दे मेरी शह-ए-लौलाक के सदक़ेमेरे मालिक दुहाई है तुझे आल-ए-पयम्बर की
जुनून-ए-'इश्क़ की नैरंगियाँ अरे तौबाकभी ख़ुदा हूँ कभी बंदा-ए-ख़ुदा हूँ मैं
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