आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "azaab-e-hijr-o-visaal"
Kalaam के संबंधित परिणाम "azaab-e-hijr-o-visaal"
कलाम
ग़म में जीता हूँ तिरे हिज्र में मरता हूँ मैंख़ुद ही बीमार हूँ और ख़ुद ही मसीहा हूँ में
आक़िल रेवाड़वी
कलाम
याद उन की दिल में रहती है और हिज्र की रातें होती हैंआँखें यूँ झम-झम रोती हैं जैसे बरसातें होती हैं
रियाज़ सुहरावर्दी
कलाम
'अजब अंदाज़ तुझ को नर्गिस-ए-मस्ताना आता हैकि हर होशियार बनने को यहाँ दीवाना आता है
बाक़िर शाहजहांपुरी
कलाम
'अजब क्या गर मुझे 'आलम ब-ईं वुस'अत भी ज़िंदाँ थामैं वहशी भी तो वो हूँ ला-मकाँ जिस का बयाबाँ था