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गो हमारा है आश्ना रे सजनतू न कर इस क़दर जफ़ा रे सजन
छुपा नहीं जा-ब-जा हाज़िर है प्याराकहाँ दो-चश्म जो मारें नज़ारा
शैख़-जी तशरीफ़ यूँ बहर-ए-ज़ियारत ले चलेलब पे तौब: उन बुतों की दिल में उल्फ़त ले चले
मिलेगी शैख़ को जन्नत हमें दोज़ख़ 'अता होगाबस इतनी बात है जिस के लिए महशर बपा होगा
बे-वफ़ा से दिल लगा कर रो पड़ेदिल पे एक चोट खा कर रो पड़े
शाख़ पर ख़ून-ए-गुल रवाँ है वहीशोख़ी-ए-रंग-ए-गुल्सिताँ है वही
किसी शोख़ की जब नज़र हो गईख़ुदी से ख़ुदी बे-ख़बर हो गई
शैख़-जी बैठ कर मय-कशों में तर्क-ए-मय का इरादा न करनाकुफ़्र है ऐसी ने'मत को पाकर शुक्र का एक सज्दा न करना
मैं ना'रा-ए-मस्ताना मैं शोख़ी-ए-रिंदानःमैं तिश्ना कहाँ जाऊँ पी कर भी कहाँ जाना
मेहरबाँ हो कर वो शोख़-ए-पुर-'इताब आने को हैबन के तारा आँख का आज आफ़ताब आने को है
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